टिप्स

मोशन सिकनेस: कहीं आपके सफर का मजा किरकिरा न कर दे

घूमने का शौक हो मगर यात्रा के दौरान सिर दर्द और चक्कर आना यानि मोशन सिकनेस की भी दिक्कत हो तो थोड़ी परेशानी तो होती ही है। लेकिन घूमने के शौकीन इन छोटी-मोटी परेशानियों से घबरा जाएं तो किस बात के घुमक्कड़। हां ये परेशानी कई बार आपके सफर को भले खराब कर देती है और आप बाकी लोगों की तरह एन्जॉय नहीं कर पाते। हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे जिन्हें अपनाकर आप इस परेशानी से भी छुटकारा पा सकते हैं और अपने सफर को एन्जॉय भी कर पाएंगे। 

घूमने के बारे में सोचिए, जी भरकर ख्वाब बुनिए...

हम में से कई लोग होते हैं जो कभी ऑफिस में चाय पीते हुए तो कभी दोस्तों के साथ कॉन कॉल पर घूमने के प्लान बनाते रहते हैं। कई बार तो लगता है कि इस बार तो घूमना तय है, कपड़ों से लेकर नए-नए पोज तक सबकी प्लानिंग हो जाती है लेकिन ऐन वक्त पर आकर ट्रिप कैंसल हो जाता है। कई बार बिना किसी लंबी-चौड़ी प्लानिंग के ट्रिप पूरे भी हो जाते हैं। घूमने का कोई भी प्लान अमली जामा पहन पाए या न, एक बात तो तय है कि इस पूरी प्लानिंग के दौरान हम काफी खुश रहते हैं। ये खुशी उस गम से बहुत ज्यादा होती है जो किसी प्लान के पूरा न हो पाने की वजह से होता है। कई सारी रिसर्च भी ये दावा करती हैं कि घूमने की प्लानिंग आपके दिमाग के लिए हैपिनेस बूस्टर का काम करती है। जब तक कोरोना वायरस का कहर पूरी तरह खत्म नहीं होगा तब तक अपने घूमने के शौक को पूरा करना किसी के लिए भी सही नहीं होगा, लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप घूमने की प्लानिंग नहीं कर सकते। पूरी दुनिया को देखने की ख्वाहिश रखने वालों के लिए एक अच्छी खबर है, अपनी अगली ट्रिप प्लान करके आप अपने तनाव को काफी कम सकते हैं। अगर आप इस बात के लिए श्योर नहीं हैं कि आपकी ये ट्रिप कब और कैसे पूरी होगी तब भी इसके बारे में सोचना आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा होगा।साल 2013 में 485 व्यस्कों पर किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई कि यात्रा करने से मन में सहानुभूति, एकाग्रता और ऊर्जा बढ़ती है। कुछ रिसर्च में यह भी दावा किया गया है कि यात्राएं रचनात्मकता को बढ़ाती हैं। सिर्फ यही नहीं, किसी ट्रिप के बारे में प्लान करना भी उतना ही ज्यादा आनंददायक होता है जितना कि उस ट्रिप का पूरा होना और इस बात को साबित करने के लिए भी शोध हो चुके हैं। 2014 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में यह बात सामने आई कि किसी भी यात्रा की योजना बनाने में कोई सामान खरीदने से ज्यादा खुशी मिलती है। इससे पहले 2002 में सर्रे यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में यह पाया गया कि लोग तब सबसे ज्यादा खुश होते हैं जब वे अपनी छुट्टियां प्लान कर रहे होते हैं।कर्नेल यूनिवर्सिटी में हुए शोध के सह लेखक अमित कुमार नेशनल जियोग्राफिक को बताते हैं कि यात्रा की योजना बनाते समय ज्यादा छोटी बातों पर ध्यान देने का कोई विशेष फायदा नहीं होता। वह कहते हैं कि लोग किसी सामान को खरीदने की तुलना में अपने सफर के अनुभवों को बताते हुए काफी खुश होते हैं। सफर के अनुभवों की कहानियां भी किसी सामान के अनुभवों से बेहतर होती हैं। अमित कुमार फिलहाल ऑस्टिन में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। आज के हालात पर चर्चा करते हुए वह कहते हैं कि इस वैश्विक महामारी की वजह से जो सोशल डिस्टेंसिंग हमें करनी पड़ रही है वह हमें इस बात का अनुभव करा रही है कि हम एक-दूसरे के साथ कितना रहना चाहते हैं। वह यहां तक कहते हैं कि हमें 'सोशल डिस्टेंसिंग' फ्रेज को बदलकर इसे 'फिजिकल डिस्टेंसिंग' कर देना चाहिए, ताकि हमें याद रहे कि हमें वाकई क्या करना है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि क्वारंटीन के नियम हमें शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रखने के लिए ही बनाए गए हैं।मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखना इससे काफी अलग है। हो सकता है कि कई लोगों से हमारी शारीरिक दूरी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हो। हम उनसे न मिल पा रहे हों लेकिन हम अभी भी उनसे वीडियो कॉल, वॉयस कॉल या सोशल मीडिया के जरिए जुड़े ही हैं। हां, आपको बात करने के लिए कुछ तो चाहिए। ऐसे में सबसे बेहतर है कि सफर की प्लानिंग करें। अमित कुमार के सह-लेखक मैथ्यू किलिंग्सवर्थ, जो अब पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल के सीनियर फेलो हैं, कहते हैं कि यात्रा की योजना में हमेशा कुछ बेहतर होने की आशा होती है। वह कहते हैं कि इंसान की फितरत होती है अपने भविष्य को लेकर योजनाएं बनाने की। हमारी यही आदत हमारे खुश रहने की वजह बन सकती है, अगर हम इसका खुशियों को ढूंढने में ही इस्तेमाल करें। और यात्राएं इसके लिए सबसे बेहतर ऑप्शन हैं।सफर की योजना बनाना एक अच्छा अनुभव ही साबित होगा इसका एक कारण पूछने पर वह कहते हैं कि यह फैक्ट ही काफी है कि ट्रिप्स टेम्पोरेरी होते हैं। हमें पता होता है कि एक ट्रिप शुरू होगा और जल्द ही खत्म भी हो जाएगा तो हमारा दिमाग पहले से ही इसके लिए तैयार होता है। किलिंगवर्थ कहते हैं कि हम जैसे ही किसी सफर की प्लानिंग करना शुरू करते हैं उसके साथ ही उसे जीने भी लगते हैं। हमारे दिमाग में तस्वीरें बनना शुरू हो जाती हैं जो यकीनन हमारी खुशी को बढ़ाती हैं। 

घूमने के बारे में सोचिए, जी भरकर ख्वाब बुनिए...

हम में से कई लोग होते हैं जो कभी ऑफिस में चाय पीते हुए तो कभी दोस्तों के साथ कॉन कॉल पर घूमने के प्लान बनाते रहते हैं। कई बार तो लगता है कि इस बार तो घूमना तय है, कपड़ों से लेकर नए-नए पोज तक सबकी प्लानिंग हो जाती है लेकिन ऐन वक्त पर आकर ट्रिप कैंसल हो जाता है। कई बार बिना किसी लंबी-चौड़ी प्लानिंग के ट्रिप पूरे भी हो जाते हैं। घूमने का कोई भी प्लान अमली जामा पहन पाए या न, एक बात तो तय है कि इस पूरी प्लानिंग के दौरान हम काफी खुश रहते हैं। ये खुशी उस गम से बहुत ज्यादा होती है जो किसी प्लान के पूरा न हो पाने की वजह से होता है। कई सारी रिसर्च भी ये दावा करती हैं कि घूमने की प्लानिंग आपके दिमाग के लिए हैपिनेस बूस्टर का काम करती है। जब तक कोरोना वायरस का कहर पूरी तरह खत्म नहीं होगा तब तक अपने घूमने के शौक को पूरा करना किसी के लिए भी सही नहीं होगा, लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप घूमने की प्लानिंग नहीं कर सकते। पूरी दुनिया को देखने की ख्वाहिश रखने वालों के लिए एक अच्छी खबर है, अपनी अगली ट्रिप प्लान करके आप अपने तनाव को काफी कम सकते हैं। अगर आप इस बात के लिए श्योर नहीं हैं कि आपकी ये ट्रिप कब और कैसे पूरी होगी तब भी इसके बारे में सोचना आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा होगा।साल 2013 में 485 व्यस्कों पर किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई कि यात्रा करने से मन में सहानुभूति, एकाग्रता और ऊर्जा बढ़ती है। कुछ रिसर्च में यह भी दावा किया गया है कि यात्राएं रचनात्मकता को बढ़ाती हैं। सिर्फ यही नहीं, किसी ट्रिप के बारे में प्लान करना भी उतना ही ज्यादा आनंददायक होता है जितना कि उस ट्रिप का पूरा होना और इस बात को साबित करने के लिए भी शोध हो चुके हैं। 2014 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में यह बात सामने आई कि किसी भी यात्रा की योजना बनाने में कोई सामान खरीदने से ज्यादा खुशी मिलती है। इससे पहले 2002 में सर्रे यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में यह पाया गया कि लोग तब सबसे ज्यादा खुश होते हैं जब वे अपनी छुट्टियां प्लान कर रहे होते हैं।कर्नेल यूनिवर्सिटी में हुए शोध के सह लेखक अमित कुमार नेशनल जियोग्राफिक को बताते हैं कि यात्रा की योजना बनाते समय ज्यादा छोटी बातों पर ध्यान देने का कोई विशेष फायदा नहीं होता। वह कहते हैं कि लोग किसी सामान को खरीदने की तुलना में अपने सफर के अनुभवों को बताते हुए काफी खुश होते हैं। सफर के अनुभवों की कहानियां भी किसी सामान के अनुभवों से बेहतर होती हैं। अमित कुमार फिलहाल ऑस्टिन में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। आज के हालात पर चर्चा करते हुए वह कहते हैं कि इस वैश्विक महामारी की वजह से जो सोशल डिस्टेंसिंग हमें करनी पड़ रही है वह हमें इस बात का अनुभव करा रही है कि हम एक-दूसरे के साथ कितना रहना चाहते हैं। वह यहां तक कहते हैं कि हमें 'सोशल डिस्टेंसिंग' फ्रेज को बदलकर इसे 'फिजिकल डिस्टेंसिंग' कर देना चाहिए, ताकि हमें याद रहे कि हमें वाकई क्या करना है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि क्वारंटीन के नियम हमें शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रखने के लिए ही बनाए गए हैं।मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखना इससे काफी अलग है। हो सकता है कि कई लोगों से हमारी शारीरिक दूरी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हो। हम उनसे न मिल पा रहे हों लेकिन हम अभी भी उनसे वीडियो कॉल, वॉयस कॉल या सोशल मीडिया के जरिए जुड़े ही हैं। हां, आपको बात करने के लिए कुछ तो चाहिए। ऐसे में सबसे बेहतर है कि सफर की प्लानिंग करें। अमित कुमार के सह-लेखक मैथ्यू किलिंग्सवर्थ, जो अब पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल के सीनियर फेलो हैं, कहते हैं कि यात्रा की योजना में हमेशा कुछ बेहतर होने की आशा होती है। वह कहते हैं कि इंसान की फितरत होती है अपने भविष्य को लेकर योजनाएं बनाने की। हमारी यही आदत हमारे खुश रहने की वजह बन सकती है, अगर हम इसका खुशियों को ढूंढने में ही इस्तेमाल करें। और यात्राएं इसके लिए सबसे बेहतर ऑप्शन हैं।सफर की योजना बनाना एक अच्छा अनुभव ही साबित होगा इसका एक कारण पूछने पर वह कहते हैं कि यह फैक्ट ही काफी है कि ट्रिप्स टेम्पोरेरी होते हैं। हमें पता होता है कि एक ट्रिप शुरू होगा और जल्द ही खत्म भी हो जाएगा तो हमारा दिमाग पहले से ही इसके लिए तैयार होता है। किलिंगवर्थ कहते हैं कि हम जैसे ही किसी सफर की प्लानिंग करना शुरू करते हैं उसके साथ ही उसे जीने भी लगते हैं। हमारे दिमाग में तस्वीरें बनना शुरू हो जाती हैं जो यकीनन हमारी खुशी को बढ़ाती हैं। 

ट्रैवल प्लान कैंसिल हुआ है फ्यूचर प्लानिंग तो नहीं

इस बार गर्मियों में आपने जो छुट्टियां प्लान की थीं, वह कोरोना संक्रमण के चलते या तो कैंसिल हो गईं या फिर आगे खिसक गईं। पैसों से लेकर ऑफिस की छुट्टियां जैसी काफी कैलकुलेशन के बाद बने प्लान का कैंसिल होना दुखद तो है। हालांकि, इसके बावजूद आपको उदास होने की जरूरत नहीं है क्योंकि सिर्फ प्लान ही कैंसिल हुआ है घूमने की फ्यूचर प्लानिंग तो नहीं। हम आपको बताएंगे कि कैसे लॉकडाउन के चलते जो खाली समय आपको मिला है उस दौरान आप अगली ट्रिप बेहतर तरीके से प्लान कर सकते हैं। 

तूफानी करने से पहले इन बातों का रखें ख्याल

कुछ टाइम पहल एक वीडियो खूब वायरल हुआ, जिसमें पैराग्लाइडिंग कर रहा एक शख्स अपने इंस्ट्रक्टर को लैंड कराने के लिए मिन्नतें करता नजर आया था। इस दौरान युवक ने खुद का तो मजाक बनवाया ही, साथ ही पैराग्लाइडिंग की परेशानियों की ओर भी लोगों का ध्यान खींचा। अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं और कुछ तूफानी करने की तमन्ना रखते हैं तो कुछ बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। मुश्किल हालातों में जरूरी टिप्स आपकी जान बचाने में मददगार साबित हो सकते हैं।

सोलो ट्रिप कर रहें हैं प्लान तो रखिए इन बातों का ध्यान

घूमने का शौक रखने वाले को बस बहाना चाहिए फिर फैमिली, रिश्तेदार या दोस्त प्लान कैंसिल भी कर दें तो क्या फर्क पड़ता है। घुमक्कड़ी तो अकेले ही निकल पड़ते हैं और अकेले घूमने का अपना अलग ही मजा है लेकिन जब आप अकेले सफर कर रहे हों तो सावधानियां भी बढ़ जाती हैं। सामान से लेकर खुद की सुरक्षा सभी का ध्यान रखना जरूरी होता है। अगर आप भी सोलो ट्रिप प्लान कर रहे हैं तो हम आपको कुछ टिप्स दे रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अपनी ट्रिप को पूरी तरह से एन्जॉय कर पाएंगे। 

इन बातों का ध्यान रखकर लें एडवेंचर स्पोर्ट्स का मजा

एडवेंचर का शौक किसे नहीं होता। ट्रैवलिंग और एडवेंचर का शौक एक साथ हो तो यह एक्सपीरिएंस जिंदगी भर के लिए यादगार हो जाता है। एडवेंचर स्पोर्ट्स का चलन देश में तेजी से बढ़ रहा है। यह देखने में जितना रोमांचक नजर आता है उतना ही खतरनाक भी है, लेकिन एडवेंचर स्पोर्ट्स के साथ अगर कुछ जरूरी टिप्स याद रखें तो आप इसका लुत्फ आसानी से उठा सकते हैं।

घूमें, लेकिन जिम्मेदारियों का रखें ध्यान

आपको घूमने का शौक है। ख्वाबों, ख्यालों वाली दुनिया को आप हकीकत के चश्मे से देखना चाहते हैं। जब आपको वक्त मिलता है, आप घूमने चले जाते हैं। कभी-कभी न होने पर यहां वहां से जुगाड़ कर वक्त निकाल कर भी घूम आते हैं। जब आप कहीं घूमने जाते होंगे तो कई तैयारियां करते होंगे। मसलन, वहां के मौसम के हिसाब से कपड़े पैक करना, सफर में काम आने वाले हर सामान को साथ रखना, उस डेस्टिनेशन के बारे में जानकारी जुटाना वगैरह, वगैरह। इस सबके साथ क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है या जानने की कोशिश की है कि कहीं घूमने के दौरान आपकी कुछ जिम्मेदारियां भी होती हैं?कहीं भी घूमते वक्त आपके पास मौका होता है रोज की जिम्मेदारियों से दूर रहने का और जिंदगी को पूरी तरह एंजॉय करने का, लेकिन एक पर्यटक के तौर पर भी हमारी कुछ जिम्मेदारियां होती हैं, जो हमें पूरी करनी चाहिए। ये जिम्मेदारियां उतनी बड़ी नहीं होतीं कि आप इनसे दूर भागें और खुलकर मजा न कर सकें। हम आपको बता रहे हैं ऐसी ही कुछ बातों के बारे में जिन्हें आपको टूरिस्ट प्लेसेज पर जाते वक्त ध्यान रखना है।

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