वाराणसी का वो अनोखा होटल जहां लोग मरने के लिए चेक-इन करते हैं, लेकिन सिर्फ 15 दिन रुक सकते हैं, वजह हैरान कर देगी!

अनुषा मिश्रा 08-09-2026 12:59 PM My India

भारत में होटल तो कई हैं—कुछ नजारे देखने के लिए, कुछ आराम के लिए। लेकिन वाराणसी में एक ऐसा होटल है, जहां लोग घूमने-फिरने नहीं, बल्कि अपनी आखिरी सांस लेने के लिए आते हैं।

इसका नाम है मुक्ति भवन (पूरा नाम काशी लाभ मुक्ति भवन)।

यह गेस्टहाउस वाराणसी के गोडौलिया इलाके में, मिस्सिर पोखरा के पास, गिरजा घर चौराहा के करीब स्थित है। गीता मंदिर रोड पर बनी यह छोटी सी इमारत काशी के पुराने गलियारों और घाटों के बिल्कुल पास है। यहां आने वाले ज्यादातर बुजुर्ग होते हैं, जो मानते हैं कि उनका आखिरी समय नजदीक आ चुका है।

क्यों आते हैं लोग यहां मरने?

हिंदू धर्म में एक पुरानी मान्यता है—“काश्यां मरणं मुक्तिः”। मतलब काशी में मरने से मोक्ष मिल जाता है। लोग मानते हैं कि काशी में प्राण छोड़ने वाले को भगवान शिव खुद तारक मंत्र सुनाते हैं, जिससे आत्मा जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाती है।

इसलिए कई बुजुर्ग अपने परिवार के साथ यहां आते हैं। उनके लिए यह मौत का डर नहीं, बल्कि मोक्ष की यात्रा है।

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कैसे शुरू हुआ मुक्ति भवन?

मुक्ति भवन की शुरुआत 1958 में डालमिया चैरिटेबल ट्रस्ट ने की थी। तब से लेकर आज तक यहां हजारों लोग आ चुके हैं। इसकी अनोखी कहानी इतनी फैली कि 2016 में इसी विषय पर हिंदी फिल्म ‘मुक्ति भवन’ (Hotel Salvation) भी बनी, जिसमें एक बुजुर्ग पिता और बेटे की कहानी दिखाई गई थी।

अंदर का माहौल कैसा है?

बाहर से देखने पर यह आम गेस्टहाउस जैसा लगता है, लेकिन अंदर का माहौल बिल्कुल अलग है। यहां रोजाना भजन, कीर्तन, रामचरितमानस और गीता का पाठ होता रहता है। परिवार वाले अपने बुजुर्गों के साथ रहते हैं। कोई जबरदस्ती मौत नहीं दी जाती। सिर्फ स्वाभाविक मौत का इंतजार होता है। अगर किसी की तबीयत ठीक हो जाए या 15 दिन बाद भी वे जिंदा रहें, तो उन्हें दूसरे इंतजाम करके निकलना पड़ता है।

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15 दिन का सख्त नियम क्यों?

यही सबसे चौंकाने वाली बात है। मुक्ति भवन में सिर्फ 15 दिन तक रुकने की अनुमति है। अगर इस अवधि में मृत्यु नहीं होती, तो परिवार को कमरा खाली करना पड़ता है।

क्योंकि यह जगह लंबे समय तक रहने के लिए नहीं बनी है। इसका मकसद सिर्फ उन लोगों को जगह देना है, जो वाकई अंतिम अवस्था में हैं। लंबे समय तक ठहरने वाले लोगों के लिए यहां जगह नहीं रखी जाती, ताकि जरूरत मंद लोगों को मौका मिल सके।

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