एडवेंचर

ज्वालामुखी के ऊपर बसे हैं ये खूबसूरत शहर

आज से लगभग 14.5 करोड़ साल पहले जुरासिक युग के अंत के पांच प्रमुख कारणों में से एक ज्वालामुखियों में हुए विस्फोट को भी माना जाता है। ज्वालामुखियों में विस्फोट कई बार परमाणु बम जितने शक्तिशाली और विनाशकारी भी होते हैं। क्या आपको लगता है ऐसे विनाशकारी खतरों के बीच कोई शहर बस सकता है? अगर आपका जवाब न है, तो आपको जानकार आश्चर्य होगा कि दुनिया के कई ऐसे शहर हैं जो ज्वालामुखियों के नज़दीक आबाद हैं। यहां की रौनक तो देखते ही बनती है।आखिर लोग ज्वालामुखी जैसी खतरनाक जगहों पर क्यों बसे हुए हैं?  "हम अक्सर ज्वालामुखियों को एक खलनायक के रूप में देखते हैं, पर उनको देखने का ये सही नजरिया नहीं है।" ये शब्द हैं अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वे की रिसर्चर सारा मैकब्राइड के। सिर्फ इसलिए कि एक ज्वालामुखी मौजूद है, ये जरुरी नहीं कि ये विनाशकारी ही हो। यहां तक कि बहुत से लोग सिर्फ अपने अस्तित्व के लिए ज्वालामुखियों पर निर्भर हैं। ज्वालामुखी के भूतापीय ऊर्जा से आस-पास के समुदायों अपने तकनीकी सिस्टम को आसानी से ऑपरेट कर पाते हैं। माना जाता है कि सक्रिय ज्वालामुखियों के पास की मिट्टी अक्सर खनिज से भरपूर होती है जो खेती के लिए फायदेमंद होती है। आइए आपको हम कुदरत के इसी खजाने की सैर पर ले चलते हैं। 

मोगली और शेरखान के अड्डे की सैर

नीरज अंबुजऐसा कहा जाता है कि रुडयार्ड किपलिंग की ‘जंगल बुक’ कान्हा नेशनल पार्क पर आधारित है। यहां दूर तक फैले घास के मैदान, साल और बांस के घनघोर जंगल,  उछलते-कूदते बारहसिंघे, ताल किनारे पानी पीते हिरण, पक्षियों के झुरमुट, जंगली भैंसे, अजगर, लंगूर, भालू, हाथी जंगल बुक के सारे किरदार आंखों के सामने उतर आते हैं।एक दिन अचानक नीरज पाहुजा जी का फोन आया। उन्होंने कान्हा नेशनल पार्क चलने को कहा। मैंने आधा घंटा मांगा और दस मिनट में ही हामी भर दी। पाहुजा जी पर्यटन अधिकारी हैं। अभी तक उनसे ख़बरों के सिलसिले में ही बात होती थी। पहली बार घूमने जा रहे थे। वन्यजीवों से उन्हें विशेष लगाव है। देश के ज्यादातर नेशनल पार्क घूम चुके हैं। दुधवा के तो लॉकडाउन में चार राउंड लगा चुके हैं। इनके पास जंगल की एक से बढ़कर एक दिलचस्प कहानियां हैं। लखनऊ से हम दोनों साथ में निकले। इलाहाबाद में एक साथी जितेन्द्र सिंह को लेना था। उम्र 50 साल, लेकिन चेहरे की रौनक से 35-40 से ज्यादा नहीं लगते हैं। बेहद सरल और सौम्य। वह हद दर्जे के सकारात्मक आदमी और बनारस के बड़े ट्रेवल एजेंट हैं। पिछले तीस वर्षों से फील्ड में सक्रिय हैं।हम लखनऊ से इलाहाबाद पहुंचे। रात होटल में गुजारी। जितेन्द्र सिंह से मिले। सुबह आठ बजे इलाहाबाद से रीवा, मैहर, कटनी, जबलपुर होते हुए कान्हा नेशनल पार्क पहुंचे। कान्हा मध्य प्रदेश के मंडला जिले में पड़ता है। यहां पर्यटकों की एंट्री के लिए मुक्की, किसली, सरही...गेट हैं। मुक्की गेट से हमारी चार सफारी बुक थीं। दो सुबह की थीं, दो शाम की। दिनभर के सफ़र  जब मुक्की पहुंचे तो वन विभाग की एक चौकी पड़ी। वहां एक पीली पर्ची काटी गई। पैसा एक ढेला नहीं लिया गया। पर, उस पर टाइम नोट कर दिया गया। ये माजरा कुछ समझ से परे था। जंगल में नौ किमी चलने के बाद मुक्की गेट आया। चौकी पर गाड़ी रुकवा ली गई। मैं नीचे उतरा। वनकर्मी ने पर्ची पर टाइम चेक किया। बोला, गाड़ी तेज चलाकर आए हो। चालान कटेगा। सड़क पर जगह-जगह मोड़ थे। स्पीड ब्रेकर थे। गाड़ी क्या आदमी भी यहां तेज क़दमों से नहीं चल सकता था। फिर चालान काहे का। वनकर्मी बोला, ये पीली पर्ची स्पीड टेस्ट के लिए है। नौ किलोमीटर में आधे घंटे लगने चाहिए थे। आप 27 मिनट में पहुंच गए। मैंने कहा, तीन मिनट के लिए क्या दो हजार का चालान काट दोगे? उसने कुछ सोचा, फिर बैरिकेड उठवा दिया। बोला, जाइए। गाड़ी धीमी चलाइयेगा।मुक्की गेट के बाहर ही मुक्की गांव है। यहीं पर शानदार बाघ रिजॉर्ट है। जिसमें लकड़ी का शानदार काम हुआ है। एथनिक लुक दिल मोह लेता है, फिर पक्षियों की भरमार भी है। रिजाॅर्ट के मालिक विष्णु सिंह गेट पर ही हमारा इंतजार कर रहे थे। उनसे मुलाकात हुई। उन्होंने डिनर भी हमारे साथ किया। वह यारबाज किस्म के इन्सान थे। थकान के बावजूद देर रात तक उनसे बात होती रही। सुबह 6.45 पर हमारी पहली सफारी थी। हमने विष्णु जी से साथ में चलने को कहा। उन्होंने बताया कि भरतपुर से उनके बचपन के मित्र आए हैं। उनके साथ कान्हा जाना है।सुबह पांच बजे उठे। हल्की-हल्की ठण्ड थी। जिप्सी ड्राइवर कमलेश ने कम्बल रखे। रिजॉर्ट से निकलकर मुक्की गांव देखा। गांव के सारे घर नीले रंग (नील) से पुते हुए थे। कमलेश ने बताया, यह गोंड आदिवासियों का इलाका है। उनकी शिव जी में गहरी आस्था रहती है। नीलकंठ की तरह घर भी नीले रखते हैं। गांव के किसी भी घर में फाटक भी नहीं थे। सिर्फ दो बल्लियां ऐसे लगाई गई थीं कि जानवर न घुस सकें। चोरी-चकारी का सवाल ही नहीं था। रास्ते में ढेरों महुआ के पेड़ दिखे। वहां महिलाएं दुधमुंहे बच्चों को किनारे रखकर महुआ के फूल बीन रही थीं।

भारत में हैं ये जंगल ट्रैक, एडवेंचर के शौकीनों के लिए जन्नत से कम नहीं

ढेर सारी हरियाली, हवा के साथ आती पत्तों की आवाजें, चिड़ियों की चहचहाहट और बीच में से कभी हाथी की चिंघाड़ तो कभी बाघ की दहाड़। ये सब शायद हर किसी को पसंद होता है। अगर आप वाइल्ड लाइफ प्रेमी हैं, तब तो सोने पर सुहागा। हमारे देश में ऐसे कई जंगल हैं जहां पर आप कुदरत की इन नेमतों का जी भर कर मजा ले सकते हैं। साथ में एडवेंचर का डोज तो होगा ही। भारत के जंगलों के बारे में लोग बहुत कम ही जानते हैं। यहां ट्रैकिंग का मजा ही कुछ और होता है। एडवेंचर के शौकीन लोगों को हाइकिंग और ट्रैकिंग का लुत्‍फ उठाने का मौका भी इन जंगलों में ही मिलता है। हम आपको बताने जा रहे हैं देश के ऐसे ही कुछ जंगलों के बारे में जहां आप खूब मजे कर सकते हैं। 

लॉकडाउन के बाद: घर पर हो गए हैं बोर तो लीजिए इन रोड ट्रिप्स का मजा

दुनियाभर में लोग कोरोना वायरस के कारण फैली महामारी से परेशान हैं। इस महामारी के पहले वाली जिंदगी दोबारा जीने की हर कोई उम्मीद लगाए बैठा है, लेकिन अब लोगों ने धीरे-धीरे इस महामारी के साथ जीने की आदत डाल रहे हैं और वापस अपनी पुरानी जिंदगी की ओर लौटने लगे हैं। कई ऐसे लोग हैं जो इस बीच घर पर बैठे-बैठे बोर हो गए हैं। अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो हम लेकर आए हैं कुछ ऐसी नजदीकी जगहों की लिस्ट जहां की सैर आप अपनी कार में ही बैठकर पूरी सुरक्षा के साथ कर सकते हैं।

कोरोना में चिड़ियों से अंखियां लड़ाना

क्या चल रहा है इन दिनों? कहने का मतलब, क्वारंटीन में आप किस तरह दिन बिताते हैं। क्वारंटीन के वक्त आप बाहर के लोगों से नहीं मिल रहे होंगे। पर क्या आपने ध्यान दिया इन सबके बीच कुछ मेहमान ऐसे भी हैं, आपके द्वारा तय की गई इन बंदिशों का नहीं मानते और रोज घर का मुआयना करने चले आते हैं। मुमकिन है आपको इन मेहमानों से मुलाकात पसंद आएगी क्योंकि कई दिनों से घर में रहते हुए अलग-अलग खिड़कियों से दिखने वाला नजारा अब याद हो गया होगा, लॉन में टहलते हुए चिड़ियों का झुंड दिखता होगा, छत पर शाम को टहलते हुए अगर आसमान में नजर गई होगी, तो नीड़ की ओर लौटती पक्षियों की कतार अभी भी जेहन में ताजा होगी।

स्कूबा डाइविंग के शौकीनों के लिए बेहतरीन हैं भारत की ये जगहें

कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें पानी देखकर ही डर लगता है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो समंदर और नदियों के अंदर की दुनिया को जानने और समझने के लिए उत्सुक रहते हैं। अगर आपको भी समुद्री जीवन को जानने और समझने का शौक है तो स्कूबा डाइविंग आपके लिए बेस्ट एडवेंचर एक्टिविटी है। 

अगर आपको भी है बंजी जंपिंग का शौक? ये जगहें हैं बेस्ट

घूमने का शौक लगभग हर किसी को होता है। कोई सिर्फ सुकून के लिए घूमता है तो कोई मस्ती के लिए। पहाड़ हों या समंदर हर कोई अपने-अपने तरीके की एक्टिविटीज ढूंढ ही लेता है। तेजी से पॉप्युलर होती एडवेंचर एक्टिविटीज में बंजी जंपिंग का भी नाम शामिल है। अगर आपने अभी तक इसे ट्राई नहीं किया तो भारत में कई ऐसी जगहें हैं जहां जाकर आप बंजी जंपिंग का मजा ले सकते हैं। 

रिवर राफ्टिंग का है शौक तो एक्सप्लोर करें ये 5 जगहें

रिवर राफ्टिंग हमारे देश के सबसे पॉप्युलर एडवेंचर स्पोर्ट्स में से एक है। खतरों से खेलने वाले युवा इस तरह की एडवेंचर एक्टिविटीज के लिए मौके ढूंढते रहते हैं। इसीलिए यहां कई ऐसी जगह हैं जहां की रिवर राफ्टिंग काफी फेमस है। वैसे तो ज्यादातर लोग इस खतरे का खेल बताकर इससे दूर रहने को कहते हैं, लेकिन यकीन मानिए रिवर राफ्टिंग में इतना मजा आता है कि कब आप राफ्ट पर बैठकर नदियों की लंबी दूरी नाप लेते हैं पता ही नहीं चलता।  हालांकि रिवर राफ्टिंग में थोड़ा खतरा तो रहता है, लेकिन थोड़‍ी सी सावधानी बरत कर इसे जी भरकर एंजॉय किया जा सकता है। चलिए हम आपको बताते हैं भारत में रिवर राफ्टिंग की पांच सबसे बेहतरीन जगहों के बारे में। 

पैराग्लाइडिंग के लिए बेस्ट है हिमाचल की ये जगह

एडवेंचर को पसंद करने वाले लोग कितने साहसी होते हैं, इस बात का अंदाजा तो इसी से लग जाता है कि कभी वे हजारों फीट ऊपर से सिर्फ एक रस्सी बांधकर नीचे कूद जाते हैं तो कभी असमान में उड़ने को तैयार रहते हैं। वैसे तो ज्यादातर लोग ये मानते हैं कि भारत में एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए कुछ खास नहीं है, लेकिन ये अब ऐसा नहीं है।

यहां आकर लीजिए एडवेंचर स्पोर्ट्स का मजा

एडवेंचर स्पोर्ट्स के शौकीनों के लिए भारत में कई जगह हैं। अगर आप भी मानते हैं कि डर के आगे ही जीत है और नई-नई एक्टिविटीज करने का शौक रखते हैं तो ये जगहें आपके लिए ही हैं। 

एडवेंचर स्पोर्ट्स का है शौक, ये जगहें ये बेस्ट

एडवेंचर स्पोर्ट्स का शौक है और नई-नई जगह एक्सप्लोर करना चाहते हैं तो घूमना और भी ज्यादा मजेदार हो जाता है। भारत में ऐसी बहुत सी जगह हैं जहां आप इन दोनों शौकों को एक साथ पूरा कर सकते हैं। जानिए इन जगहों के बारे में...

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