इतिहास का खजाना है यह छोटा सा शहर

अनुषा मिश्रा 08-02-2024 03:23 PM My India

एक ऐसा शहर जहां मंदिर भी हैं, मस्जिद भी, किले भी हैं और स्तूप भी, गुफाएं भी हैं और पहाड़ भी, जिसका इतिहास भी कमाल का है और जो अपने वर्तमान से भी लोगों को आकर्षित करता है। हम बात कर रहे हैं पश्चिमी भारत में अरब सागर से लगे हुए गुजरात के जिले जूनागढ़ की। 

सब कुछ समेटे है

महाबत किले की कमाल की नक्काशी देखनी हो, गिरनार पर्वत से एक शहर की खूबसूरती, आठ सौ से ज्यादा जैन और हिंदू मंदिरों में आस्था की लहर को जीना हो या पुराने किले में जाकर इतिहास को टटोलना हो, आप जूनागढ़ का रुख कर सकते हैं। इस शहर में आज भी आपको देने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन इसका इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है। गुजराती भाषा में जूनागढ़ का अर्थ होता है प्राचीन किला। इस पर कई वंशों ने शासन किया। यहां समय-समय पर हिंदू, बौद्ध, जैन और मुस्लिम, चार प्रमुख धर्मों का प्रभाव रहा है। 

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जूनागढ़ का घंटाघर

इतिहास

जूनागढ़ के पुराने शहर का नाम एक दुर्ग के नाम पर पड़ा था। कहते हैं कि इस शहर का निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था और यह चूड़ासमा की राजधानी व एक रियासत हुआ करता था। यहां स्थित गिरनार पर्वत के रास्ते में एक गहरे रंग की बेसाल्ट की चट्टान है। इस चट्टान पर तीन राजवंशों का प्रतिनिधत्व करने वाला शिलालेख अंकित है। लगभग 260-238 ई. पू. तक मौर्य शासक अशोक, 150 ई. में रुद्रमान और 455 - 467 तक स्कंदगुप्त का शासन रहा। जूनागढ़ में 100-700 ई. के दौरान बौद्धों की बनाई गई गुफाओं के साथ एक स्तूप भी है। इस शहर में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की बौद्ध गुफाएं, पत्थर पर उत्कीर्णित सम्राट अशोक का आदेश पत्र और गिरनार की चोटियों पर जैन मंदिर भी हैं। यह 15वीं शताब्दी तक राजपूतों का भी गढ़ रहा। इस पर 1472 में गुजरात के महमूद बेगढ़ा ने कब्जा कर लिया। उन्होंने जूनागढ़ का नाम मुस्तफाबाद रख दिया और एक मस्जिद बनवाई, जो अब लगभग खंडहर हो चुकी है।

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नेमी जैन मंदिर

भारत को आजादी मिलने के बाद का भी जूनागढ़ का एक बहुत ही दिलचस्प किस्सा है जो अब इतिहास बन चुका है। कहते हैं कि जब सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 500 से ज्यादा रियासतों का विलय भारत में करवा दिया तब जूनागढ़ के नवाब मोहम्मद महाबत खानजी तृतीय रसूल खानजी यहां का विलय पाकिस्तान में करना चाहते थे। हालांकि, इस राज्य में ज्यादातर हिंदू थे और वे भारत में रहने के पक्ष मे थे, इसलिए यहां के नवाब को भारत में विलय के लिए तैयार होना पड़ा। जूनागढ़ उस समय हैदराबाद के बाद दूसरे नंबर का सबसे धनवान राज्य था, लेकिन यहां के नवाब जिन्ना से समझौता करके अपनी संपत्ति जूनागढ़ में छोड़कर पाकिस्तान चले गए। यहां तक कि उन्होंने जूनागढ़ की संपत्ति के बदले में पाकिस्तान में संपत्ति भी नहीं मांगी।

घूमने को बहुत कुछ

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महाबत खान का मकबरा

यहां महाबत खान का मकबरा, गिरनार पर्वत, अशोक के शिलालेख, अपरकोट किला, सक्करबाग प्राणी उद्यान, गिर वन्यजीव अभयाराण्य, बौद्ध गुफा, अड़ी-कड़ी वाव और नवघन कुआं, दत्त हिल्स, भवनाथ मंदिर, कालिका मंदिर, जामी मस्जिद, अम्बे माता का मंदिर, मल्लिनाथ का मंदिर, जूनागढ़ संग्रहालय, आयुर्वेदिक कॉलेज, दरबार हॉल संग्रहालय, नरसिंह मेहता का चबूतरा, दामोदर कुंड जैसे कई जगहें जहां आप घूमने जा सकते हैं। 

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