ये मेरा इंडिया

प्राकट्य से उपसंहार तक, श्री कृष्ण के जीवन से जुड़े मंदिर

एक मार्गदर्शक, एक दार्शनिक, एक नटखट बच्चा, एक छोटा सा भगवान, एक सखा, एक चमकते तारे की आभा वाला, एक शूरवीर, ज़िन्दगी के हर पहलू में, हर रूप में कृष्ण हैं। वो राधा का प्रेम है तो रुक्मिणी का जीवन, यशोदा का लाल है तो देवकी का दुलार, गोपियों का श्रृंगार है तो सबका तारनहार। कृष्ण प्रेम भी हैं और प्रतिशोध भी, कृष्ण विराट हैं और बाल भी। वह एक अद्भुत संन्यासी, एक अद्भुत गृहस्थ और साथ ही एक शक्तिशाली नेता थे। भगवान कृष्ण के जीवनकाल में हुई सभी घटनाओं से जुड़े कई मंदिर भारत के विभिन्न कोनों में हैं। तो हम बताते हैं आपको कि इस जन्माष्टमी पर आपके कान्हा की ज़िंदगी से जुड़े कुछ मशहूर मंदिरों के बारे में…

हनुमान जी की सबसे ऊंची मूर्ति है यहां, दिलचस्प है इतिहास

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं की जीवंत सुंदरता के बीच बना, जाखू मंदिर एक प्राचीन हनुमान मंदिर है जो पवन पुत्र हनुमान के भक्तों के बीच बेहद प्रसिद्ध है। शिमला के मशहूर दर्शनीय स्थलों में से एक इस मंदिर में  भगवान हनुमान की दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति है। लोग यहां प्रभु के दर्शन के लिए तो आते ही हैं, शिमला आने वाले हर धर्म और संप्रदाय के टूरिस्ट्स इस विशाल मूर्ति को देखने भी आते हैं। यह मंदिर समुद्र तल से 8048 फीट की ऊंचाई पर है। 2010 में हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकार ने यहां 108 फीट की हनुमान प्रतिमा स्थापित की थी। इस मूर्ति को पूरे शिमला से देखा जा सकता है। श्रद्धालु यहां पैदल, निजी कार या रोपवे से जाते हैं। शिमला में रिज नामक जगह से यहां जाने के लिए रोप वे लिया जा सकता है। जाखू मंदिर से पास के शहर संजौली का व्यू भी बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का के अद्भुत नज़ारे को देखने के लिए कई ट्रेकर्स भी यहां आते हैं। सिर्फ मंदिर ही नहीं, यहां तक पहुंचने का रास्ता भी बहुत सुंदर है। 

लॉन्ग वीकेंड में घूमने के लिए परफेक्ट हैं ये हिल स्टेशन्स

रक्षाबन्धन यानी 11 अगस्त (गुरुवार) से इस बार लॉन्ग वीकेंड शुरू हो रहा है। अब आप ये मत कहना कि 'सबका नहीं होता लक्ष्मण' । मेरा भी नहीं है लेकिन आपमें से कई का तो होगा। तो अगर आपकी भी 11 अगस्त से 16 अगस्त तक कि छुट्टी है या आपने प्लान कर ली है तो आप इसमें एक ट्रिप पूरी सकते हैं। हम आपको बता रहे हैं दिल्ली के पास के कुछ ऐसे हिल स्टेशन्स जहां इस समय मौसम एकदम मेहरबान होता है और अगर आप पहले से टिकट बुक कराना भूल गए हैं तो एकदम से भी यहां जाने की प्लानिंग कर सकते हैं।

अगस्त में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये 5 जगहें

अगस्त के महीने में हवा में ताजगी और हर तरफ हरियाली होती है। जो लोग घूमने के शौक़ीन हैं मॉनसून का मौसम उनके लिए बेस्ट होता है। इस मौसम में घूमने में खर्च भी कम होता है। कहते हैं कि बारिश का मौसम उन लोगों के लिए नहीं है जो हमेशा जल्दी में रहते हैं, बल्कि उनके लिए होता है जो हमेशा कुछ एडवेंचरस करने के लिए तैयार रहते हैं और कुदरत को असली खूबसूरती में देखकर खुश होते हैं। अगर आप भी बारिश पसन्द लोगों में से एक हैं तो हम आपके लिए लेकर आए हैं भारत की 5 ऐसी जगहों की लिस्ट जो जहां घूमकर आप अपने मॉनसून को यादगार बना सकते हैं।

कोटिलिंगेश्वर : जिस मंदिर में एक करोड़ से ज़्यादा शिवलिंग हैं

सावन का महीना यानी बारिश का महीना, हर तरफ हरियाली बिखेरने का महीना, त्योहारों का महीना, झूलों का महीना, गीतों का महीना… और इन सब से बढ़कर भगवान शिव का महीना। यूँ तो ईश्वर की पूजा के लिए न कोई दिन में बंध सकता है और न रात में, न वक़्त में और में और न हालात में, न महीने में और न साल में लेकिन इस महीने में ऐसा लगता है जैसे हर तरफ महादेव की भक्ति हो, हवा में भी हर-हर शम्भू गूंजता सुनाई देता है। अब जब बात शिवार्चन और आस्था की चल ही रही है तो हम आपको कर्नाटक के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताते हैं, जहां आप जिधर भी नज़र घुमाएंगे आपको सिर्फ शिवलिंग ही नज़र आएंगे। हम बात कर रहे हैं कोटिलिंगेश्वर मंदिर की। कर्नाटक के कोलार जिले का कोटिलिंगेश्वर मंदिर एक ऐसा मंदिर है, जो बहुत पुराना नहीं है लेकिन फिर भी बहुत सारे भक्तों और पर्यटकों का जमावड़ा यहां लगा रहता है। कोलार वैसे तो अपनी सोने की खदानों के लिए मशहूर है, लेकिन आप उन्हें देखने नहीं जा सकते। हालांकि, बंगलुरु से 70 किलोमीटर की दूरी पर बसे में आप कोटिलिंगेश्वर मंदिर के दर्शन ज़रूर कर सकते हैं।  बंगलुरु से यहां तक आने के लिए सड़क के दोनों ओर हरे- भरे खेत देखते हुए आप मंदिर पहुंच जाएंगे। 

इश्क़ = मॉनसून, घुमक्कड़ी और भोपाल

दो झीलों से बंटा शहर भोपाल हर तरह के पर्यटक के लिए खास है। इतिहास प्रेमी हों या कला प्रेमी, हरियाली पसंद हो पानी यहां सब मिलेगा। 'झीलों का शहर' कहा जाने वाला भोपाल बारिश के मौसम में ऐसा लगता है जैसे कुदरत ने गीले हरे रंग से इसे रंग दिया हो।अगर ये कहा जाए कि यह भारत के सबसे हरे-भरे शहरों में से एक है तो गलत नहीं होगा। इस शहर को बसाने का श्रेय जाता है राजा भोज को। यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है इसकी निशानी हैं, ऐतिहासिक स्मारक, धार्मिक स्थल और संग्रहालय। शहर को दो भागों में बांटा जा सकता है, उत्तर की ओर पुराना शहर जिसमें मस्जिदें, बाज़ार और पुरानी हवेलियां हैं व दक्षिण की ओर आधुनिक शहर हैं। शहर की दो झीलें 'भोजताल' और 'छोटा तालाब' हैं, जिन्हें ऊपरी झील और निचली झील भी कहा जाता है। यूं तो झीलें यहां आने वाले टूरिस्ट्स के लिए मेन अट्रेक्शन पॉइन्ट हैं, लेकिन ये शहर के लोगों के लिए पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं। यहां की शाहजहाँ बेगम की बनवाई हुई ताज-उल-मसाजिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। भोपाल में ऐसा बहुत कुछ है जो बारिश के मौसम में घूमने के लिए बेस्ट है। हलाली डैमबारिश के मौसम में घूमने के लिए भोपाल की सबसे खास जगहों में से एक है, हलाली डैम। यहां नौका विहार करें या पिकनिक मनाने जाएं, मज़ा आ जाएगा। 699 वर्ग किमी में फैला यहां का ताल बेहद सुंदर दिखता है। इसमें मृगल, रोहू, चीताला और मिस्टस जैसे समुद्री जीव भी पाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि राजा मोहम्मद खान नवाद ने नदी के तट के पास दुश्मन सेना का वध किया था, जिसने इसे 'हलाली' नदी नाम दिया है। इसी नदी पर इस डैम बना है।रायसेन फोर्टभोपाल से 23 किमी की थोड़ी दूरी पर एक सुंदर किला है रायसेन फोर्ट। हरियाली से भरी हुई पहाड़ी के ऊपर बना यह किला कई मंदिरों से घिरा हुआ है। इसकी तह में कई कुएं और एक विशाल ताल है। कहा जाता है कि 800 साल से ज़्यादा पुराने इस किले में एक मंदिर और एक मस्जिद भी है। प्रसिद्ध मुस्लिम संत हजरत पीर फतेहुल्लाह शाह बाबा की दरगाह के रूप में प्रसिद्ध यह किला लोगों की आस्था का गढ़ है। 13वीं शताब्दी में इसकी स्थापना के बाद से किले पर कई शासकों ने राज किया। बारिश में जब यहां के पहाड़ पर हरियाली खूब बढ़ जाती है तब हल्की फुहारों में इस किले में घूमने में काफी मज़ा आता है।

चित्रकूट में इन 5 जगहों को देखना न भूलें

चित्रकूट में घूमने के लिए कई दिलचस्प जगहें हैं। घंटियों की आवाज से गुलजार नदी घाटों से लेकर गर्व और अखंडता के प्रतीक ऊंचे किले और महल तक, झरनों से लेकर जंगल तक यहां सबकुछ है। वैसे तो यहां कई ऐसी जगहें हैं जो आपका दिल जीत लेंगी लेकिन हम आपके लिए चित्रकूट की 5 ऐसी जगहों की जानकारी लाए हैं जिन्हें देखे बिना आपकी यात्रा पूरी नहीं होगी।कामदगिरी कामदगिरी एक जंगली पहाड़ी है जो चारों तरफ से कई हिंदू मंदिरों से घिरा हुई है। इसे चित्रकूट का दिल माना जाता है। तीर्थयात्री इस पहाड़ी के चारों ओर इस विश्वास के साथ परिक्रमा करते हैं कि उनके सभी दुखों का अंत हो जाएगा और ऐसा करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होंगी। कामदगिरी का नाम भगवान राम के दूसरे नाम कामद नाथ जी से लिया गया है, इसका मतलब सभी इच्छाओं को पूरा करना है। इस पहाड़ी की परिक्रमा के 5 किलोमीटर के रास्ते पर कई मंदिर हैं, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध भरत मिलाप मंदिर है। यह उसी जगह पर बना है जहां भरत ने भगवान राम से मुलाकात की और उन्हें अपने राज्य में वापस आने के लिए मना लिया था। कामदगिरी पर्वत का कुछ भाग उत्तर प्रदेश में तो कुछ मध्य प्रदेश में पड़ता है।गुप्त गोदावरीगुप्त गोदावरी दो गुफाओं का समूह है। यहां अंदर जाने के लिए एक पतला सा रास्ता है जिसमें अमूमन हर कोई फंस जाता है। दूसरी गुफा से पानी की धाराएं निकलती हैं। ऐसा कहा जाता है कि एक बार भगवान राम और लक्ष्मण ने अपनी गुप्त बैठकें कीं, गुफा में इस बात की पुष्टि करते हुए सिहांसन नुमा कुछ रचनाएँ हैं। हालांकि चित्रकूट में ज़्यादातर धार्मिक यात्रा करने वाले लोग ही आते हैं लेकिन आजकल एडवेंचर पसंद करने वाले लोगों का भी यह पसंदीदा ठिकाना बन गया है। गुप्त गोदावरी भी ऐसे लोगों को काफी पसंद आती है।  एलीफेंटा की गुफाओं, अजंता और एलोरा की गुफाओं से मिलती जुलती यह गुफा कई लोगों को रहस्यमयी लगती है। 

यूपी: सोनभद्र के ये 5 ठिकाने हैं बेहद खूबसूरत

यूँ तो उत्तर प्रदेश के लास पर्यटकों को लुभाने के लिए बनारस, मथुरा, अयोध्या, आगरा, लखनऊ जैसी कई बड़ी जगहें हैं लेकिन यहां के छोटे-छोटे शहर भी अपने आप में बहुत खूबसूरती समेटे हैं। ऐसा ही एक जिला है सोनभद्र। यहां बारिश के मौसम को और भी सुंदर बनाने के लिए ऐसे कई ठिकाने हैं जो आपका मन मोह लेंगे।विजयगढ़ किला400 फीट लंबा, 5वीं शताब्दी का विजयगढ़ किला उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में कोल राजाओं ने बनवाया था। यह रॉबर्ट्सगंज से लगभग 30 किमी दूर रॉबर्ट्सगंज-चर्च रोड पर मऊ कलां गांव में है। किले का लगभग आधा क्षेत्र कैमूर रेंज की खड़ी चट्टानी पहाड़ियों से भरा है। किले की कुछ अनूठी विशेषताओं में गुफा में बने चित्र, मूर्तियाँ, शिलालेख और चार बारहमासी तालाब शामिल हैं जो कभी सूखते नहीं हैं। मुख्य द्वार मुस्लिम संत, सैय्यद ज़ैन-उल-अब्दीन मीर साहिब की कब्र से पहले है, जिसे लोकप्रिय रूप से हज़रत मीरान शाह बाबा कहा जाता है। यहां इन महान संत को समर्पित एक उर्स या मेला हर साल अप्रैल में आयोजित किया जाता है जिसमें सभी धर्मों के भक्तों की बड़ी भीड़ होती है।नौगढ़ किलानौगढ़ किला रॉबर्ट्सगंज में नौगढ़ टाउनशिप से लगभग 2 किमी और उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में चकिया के दक्षिणी हिस्से में 40 किमी की दूरी पर है। किले का निर्माण काशी नरेश ने करवाया था। पिछले कुछ समय से इसे सरकारी अधिकारियों के लिए गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। किला से कर्मनाशा नदी और आसपास के क्षेत्र काफी सुंदर दिखता है।नौगढ़ किले के आसपास कुछ अवशेष मिले हैं। ये अवशेष 3000 वर्ष पुराने हैं और इसके प्राचीन इतिहास के साक्षी हैं। किले के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में एक पहाड़ है जिसे गेरुवातवा पहाड़ कहा जाता है। यह पहाड़ धातु और खनिज के अवशेषों से भरा हुआ है। 

जुलाई में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये जगहें

बादलों के गड़गड़ाहट की आवाज, मिट्टी की मीठी ताज़ा महक और हरी पत्तियों पर पानी की छोटी-छोटी बूंदें, जुलाई में मानसून न केवल चिलचिलाती गर्मी से राहत देता है बल्कि कुदरत के खूबसूरत रंगों से हमें मिलवाता है। वैसे तो लोगों को बारिश में घूमना नहीं भाता लेकिन ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो हर साल मानसून आने का इंतज़ार करते हैं। ताकि वो इस मौसम में सबसे सुंदर दिखने वाली जगहों को जी भरकर निहार सकें। यहां की यात्रा कर सकें। हम आपको बता रहे हैं भारत की ऐसी 5 जगहों के बारे में जो जुलाई में बेहद खूबसूरत हो जाती हैं। केरल"गॉड्स ओन कंट्री" - केरल वास्तव में जुलाई में उफनती नदियों, हरे-भरे जंगलों और हवाओं की धुन पर लहराते नारियल के पेड़ों के साथ जीवंत हो उठता है। अलेप्पी के बैकवाटर और मुन्नार के हरे-भरे हिल स्टेशन, अथिरापल्ली और वज़ाचल के झरनों की कुदरती सुंदरता मानसून के दौरान देखने लायक होती है। केरल में जुलाई में घूमें ये जगहेंमुन्नार, एलेप्पी, पेरियार, वेम्बनाड और पोनमुडीक।केरल में जुलाई में करें ये एक्टिविटीज हाउसबोट या ट्रीहाउस में रहें, मसाले के बागान घूमें, थेय्यम और कलारीपयट्टू देखें, बैकवाटर पर क्रूज, और आयुर्वेदिक मसाज कराएं।केरल का मौसमकेरल का औसत तापमान जुलाई के महीने में 24 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। कैसे पहुंचें केरलअगर आप हवाई यात्रा करना चाहते हैं तो त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, कालीकट अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और कन्नूर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा के लिए उड़ान ले सकते हैं। यहां के बड़े रेलवे स्टेशन - तिरुवनंतपुरम सेंट्रल, एर्नाकुलम जंक्शन और एर्नाकुलम टाउन, कोझीकोड, त्रिशूर, कन्नूर, कोल्लम जंक्शन, अलुवा, पलक्कड़ जंक्शन, कोट्टायम, शोरानूर जंक्शन, थालास्सेरी हैं। 

लखनऊ में खुला है देश का सबसे बड़ा 'LuLu Mall' , जानें इसके बारे में सबकुछ

हाल ही में लखनऊ में भारत का सबसे बड़ा मॉल खुला है। इस मॉल का नाम है लुलु (LuLu Mall)। हो सकता है कि आपको ये नाम सुनने में कुछ अजीब लगे लेकिन लुलु संयुक्त अरब अमीरात का एक बड़ा ग्रुप है। हालांकि, इसके मालिक यूसुफ अली एमए भारतीय ही हैं। भारत में इस ग्रुप के चार और भी मॉल हैं।  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मॉल का उद्घाटन किया है, ये भी अपने आप में एक खास बात है। लुलु समूह 300 से अधिक ब्रांड्स का घर तो है, इस समूह के अपने लुलु हाइपरमार्केट, लुलु फैशन और लुलु कनेक्ट भी हैं। इस स्टोरी में हम आपको बताएंगे शॉपर्स और शॉपकीपर्स दोनों के लिए स्वर्ग माने जाने वाले लखनऊ के लुलु मॉल के बारे में…11 मंज़िल की पार्किंग2.2 मिलियन वर्ग फुट में फैला, लखनऊ का लुलु मॉल इतना बड़ा है कि इसमें 11 मंजिला पार्किंग है और 50,000 लोग इसमे एक साथ शॉपिंग कर सकते हैं। इस मॉल में 300 से अधिक ब्रांड हैं, जिनमें स्टोर और रिटेल आउटलेट हैं। यहां का फ़ूड कोर्ट इतना बड़ा है कि उसमें एक साथ 1600 लोगों का सिटिंग स्पेस है। फूड कोर्ट में 15 फाइन डाइनिंग रेस्तरां, 25 फूड ब्रांड आउटलेट, कैफे और बहुत कुछ है। मोबाइल चार्जिंग यूनिट्स भी यहां लगी हैं। यानी कभी अगर आपका फोन डिस्चार्ज हो भी गया तो भी आपको परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। आप यहां आराम से मोबाइल चार्ज करिये और अपने इंस्टाग्राम के लिए रील्स बनाइये, फोटोज लीजिये।  

जुलाई में बारिश के साथ लें देशभर के इन फेस्टिवल्स का मज़ा

विविधता से भरे अपने देश में हर महीने पर्वों की खुशबू तैरती रहती है। हमारे त्यौहार साल भर अपने रंगों से पूरे भारत को रोशन किए रहते हैं। जुलाई का महीना पर्वों के साथ ही साथ मॉनसून वाला भी होता है। इस महीने जहां चारों तरफ हरियाली फैलना शुरू हो जाती है, वहीं जुलाई में कई त्यौहार भी होते हैं जो इस मौसम को और खास बना देते हैं।  मॉनसून में भला किसका घूमने का मन नहीं करेगा। जुलाई में मॉनसून काफी खुशनुमा एहसास दिलाता है और तभी घूमने में आनंद आता हैं। जी हां! अगर आप भी मॉनसून के इस खास महीने में अपनी फैमिली के साथ भारत में कहीं घूमने जाना चाहते हैं, तो फिर आपका इंतजार देश के खूबसूरत ठिकाने कर रहे हैं। भारत एक ऐसा देश है जहां पर हर धर्म और समुदाय के लोग अपनी संस्कृति का जश्न मनाते हैं। जुलाई महीने के विविध त्यौहार भी पर्यटकों के लिए भारतीय संस्कृति को देखने का सबसे अच्छा तरीका पेश करते हैं। जुलाई महीने में मॉनसून अपने पूरे रंग में रहता है, तो ऐसे में सुहाना मौसम इन फेस्टिवल्स की रौनक को दोगुना कर देता है। 

फलों की राजधानी के नाम से जाना जाता है इन शहरों को

दुकानों पर बिकते ताजे फल देखकर ही उन्हें लेने का मन कर जाता है। अब जरा सोचिए कि आप सीधे अपने पसंदीदा फलों के बगीचे में पहुंच जाएं तो यकीनन उस बाग की तरह आपका मन भी बाग-बाग हो जाएगा। तो चलिए हमारे साथ, हम आपको सैर कराते हैं देशभर के उन मशहूर शहरों की जिनकी पहचान वहां होने वाले फलों से ही होती है। फलों से तो शायद हर किसी को प्यार होता है। हो भी क्यों न? आखिर हमारे शरीर की आधे से ज़्यादा ज़रूरतें फल पूरी कर देते हैं। हेल्दी शुगर का भी बेस्ट ऑप्शन फल ही होते हैं। फाइबर और मिनरल्स से भरे फलों के बारे में साइंटिस्ट्स भी कहते हैं कि जो लोग स्नैक्स की जगह फ्रूट्स खाकर पेट भरते हैं, उनका मेटाबोलिज्म बाकी लोगों की तुलना में बेहतर होता है। ये तो बातें हुईं फलों के फायदे की। अब हम आपको बताते हैं कि हमारे देश के वो कौन से वे शहर हैं जो फलों के नाम से मशहूर हैं…नागपुर के संतरेमहाराष्ट्र का नागपुर शहर, संतरों के शहर के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत का सबसे बड़ा संतरे का उत्पादक शहर है और विश्व में संतरे के कुल उत्पादन का लगभग 3 फीसदी हिस्सा नागपुर में ही पैदा होता है। 2014 में जियोग्राफिकल इंडिकेशन विभाग से इसे जीआई टैगिंग भी मिल चुकी है। नागपुर में जगह-जगह आपको कई हेक्टेयर क्षेत्र में फैले संतरे के बाग दिख जाएंगे। अगर आपको संतरे पसंद हैं तो नागपुर का रुख करिए।नागपुर में घूमने लायक जगहेंसंतरों के साथ-साथ ये शहर अपने खूबसूरत मंदिरों, झीलों, हरे भरे बगीचों के लिए जाना जाता है। अगर आप यहां आए हैं तो डॉ. अम्बेडकर की याद में और उनके बौद्ध धर्म अपनाने की घटना पर बनवाया गया दीक्षाभूमि स्तूप, समृद्ध पौराणिक इतिहास समेटे रामटेक किला, ड्रैगन पैलेस बौद्ध मंदिर (जिसे नागपुर के लोटस टेम्पल के रूप में भी जाना जाता है), लता मंगेशकर म्यूजिकल गार्डन, अक्षरधाम मंदिर, रमन विज्ञान केंद्र आदि भी घूम सकते हैं। हिमाचल प्रदेश के सेबयूं तो कश्मीर के भी सेब मशहूर हैं, लेकिन रस से भरे हिमाचली सेबों का कोई जोड़ नहीं। कहते हैं कि एक सेब जो रोज है खाता डॉक्टर को वह दूर भगाता, और अगर यह सेब हिमाचल का हो तब तो डॉक्टर भी दूर भागेगा और स्वाद भी जबरदस्त मिलेगा। हिमाचल में किन्नौर, शिमला, रोहड़ू, कोटगढ़ के साथ कई शहरों की ढलानों पर सेब के बागान हैं। सेब से लदे पेड़ों के पास फ़ोटो खिंचाइये या इन्हें डाल से खुद तोड़कर खाइए, मज़ा न आए तो पैसे वापस। अगर आप यहां जाना चाहते हैं, तो जून और सितंबर के बीच जा का समय बेस्ट है।हिमाचल प्रदेश में घूमने लायक जगहेंयूं तो हिमाचली सेब के बाग इतने सुंदर होते हैं कि यहां आकर आपका कहीं और जाने का मन ही नहीं करेगा। भई, पूरा हिमाचल ही घूमने लायक है। कुल्लू, मनाली, शोघी, शिमला, स्पीति, कसौल, कसौली कहीं भी चले जाइये। 

चाय की चुस्कियों में खो जाएंगे यहां

सौ गम भुला देगी और खुशियां बढ़ा देगी एक चाय की चुस्की को ये कमाल आता हैहो यारों की टोली या मेहमानों का जमघटमहफ़िल में हर तरह से रौनक बढ़ा देगीएक चाय की चुस्की को ये कमाल आता हैहो समंदर का किनारा या पहाड़ों की चोटीसफर को ये पहले से खूबसूरत बना देगीएक चाय की चुस्की को ये कमाल आता हैजी हां, एक चाय की चुस्की में वाकई ये कमाल है कि वो हर किसी को अपना दीवाना बना लेती है। खासकर जब हम सफर कर रहे होते हैं तब तो चाय ही हमारा पक्का हमसफ़र बनती है। तो चलिए आज हम आपको ले चलते हैं चाय के साथ, चाय के सफर पर। अरे, मेरा मतलब है चाय के बागानों के सफर पर...आपका तो पता नहीं, लेकिन मेरा कोई जानने वाला अगर ये कह देता है कि उसे चाय पसंद नहीं तो मुझे वही पसंद आना बंद हो जाता है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात में सोने तक जब भी कोई पूछे - चाय पिओगी? हमारा जवाब 'न' हो ही नहीं सकता। गली का नुक्कड़ हो या घर का कमरा, दूर तक फैली वादियां हों या घने जंगल का कोई कोना, बेड पर बिस्तर में घुसकर या खुले आसमान में सितारों के नीचे, जगह कोई भी हो, मौसम कोई भी हो, मूड कैसा भी, हो चाय उसे अच्छा बना देती है। तो ज़्यादा बातें किए बिना मैं आपको ले चलती हूं देश के सबसे अच्छे चाय बागानों की यात्रा पर। आखिर आपको भी तो पता होना चाहिए कि आपकी रग-रग को ताज़गी से भर देने वाली चाय आखिर आती कहां से है।दार्जीलिंग, पश्चिम बंगालशैम्पेन ऑफ टी के नाम से मशहूर है दार्जीलिंग शहर। दार्जिलिंग में चाय के 87 बागान हैं जिनमें हर साल लगभग 85 लाख किलो चाय पैदा होती है। यहां के हर बागान में अपने तरह की अनूठी, शानदार खुशबू वाली चाय तैयार की जाती है। दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा की ढलानों पर बसी हैं दार्जीलिंग की पहाड़ियां और इन पहाड़ियों पर हैं यहां के चाय बागान। वैसे तो यहां की हर चाय खास है, लेकिन दार्जीलिंग से 33 किलोमीटर दक्षिण की तरफ दुनिया की सबसे पुरानी चाय की फ़ैक्ट्रियों में से एक है जिसमें एक दुर्लभ किस्म की चाय की पत्ती और कली मिलती है। इसे सिल्वर टिप्स इम्पीरियल के नाम से जाना जाता है। इस चाय की कलियों को कुछ खास लोग ही तोड़ते हैं जिनका ताल्लुक मकाईबाड़ी चाय बागान से होता है। सिल्वर टिप्स इम्पीरियल चाय को पूर्णमासी की रात में ही तोड़ा जाता है। इस चाय की कीमत लगभग 37,000 रुपये किलो है। कोई बात नहीं अगर आप इतनी महंगी चाय नहीं पीना चाहते। यहां के किसी भी बागान में हरियाली के बीच बैठकर चाय पीजिए आपको मज़ा आ ही जाएगा। कैसे पहुंचें दार्जीलिंगदार्जीलिंग पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट बागडोगरा है जो यहां से 67 किलोमीटर दूर है। सड़क के रास्ते ढाई घंटे में आप एयरपोर्ट से दार्जीलिंग पहुंच सकते हैं। नजदीकी रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी है जो यहां से 70 किलोमीटर दूर है। आप चाहें तो गंगटोक, कलिम्पोंग, सिलीगुड़ी जैसे शहरों से सड़क मार्ग के जरिए भी दार्जीलिंग जा सकते हैं।जोरहाट, असमआसाम का जोरहाट सबसे बड़ा चाय उत्पादक क्षेत्र माना जाता है। यहां और इसके आसपास के इलाकों में चाय के लगभग 135 बागान हैं। यहां के सिन्‍नामोरा चाय बागान की खूबसूरती बेमिसाल है। बागान में चाय की छोटी - छोटी झाड़ियों से गुजरते हुए सैर की जा सकती है। अगर आप जानना चाहते है कि चाय कैसे बनाई जाती है, उसे कैसे उगाया जाता है तो सिन्‍नोमोरा चाय बागान सबसे अच्छी जगह है। यहां आप ये सब देख सकते हैं। इसके अलावा यहां का टोकलाई चाय अनुसंधान केंद्र, दुनिया का सबसे पुराना चाय संस्‍थान है जो जोरहाट की सुंदरता को बढ़ाता है। यहां हर वर्ष चाय महोत्सव मनाया जाता है। यानी चाय के दीवानों के लिए एकदम परफेक्ट दिन। यही वजह है कि हर साल इस दिन भारी तादाद में पर्यटकों की भीड़ यहां पहुंच जाती है। कैसे पहुंचें जोरहाट, असमजोरहाट, असम के अन्‍य भागों से अच्‍छी तरह जुड़ा हुआ है और देश के अन्‍य हिस्‍सों में भी यहां से होकर गुजरने वाले राष्‍ट्रीय राजमार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। जोरहाट में निजी हवाई अड्डा और रेलवे स्‍टेशन भी है।मुन्नार, केरलघूमने के शौकीन और कुदरत के चाहने वाले केरल को 'God's own country' कहते हैं। यूं तो केरल में हर जगह खास और घूमने लायक है, लेकिन मुन्नार की बात ही कुछ और है। तकरीबन 1700 मीटर की ऊंचाई पर बसे इस हिल स्टेशन की घुमावदार गोल-गोल पहाड़ियों पर एक ही ऊंचाई के चाय के पौधों को देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी ने पूरे इलाके में हरे रंग की मखमली कालीन बिछा दी हो। अंग्रेजों ने 1857 में मुन्नार में चाय बागान की नींव रखी थी। जॉन डेनियल मुनरो जब केरल पहुंचे तो उन्हें इस जगह से प्यार हो गया। बस तभी से केरल चाय बागानों का घर बन गया। यहां - एवीटी चाय, हैरिसन मलयालम, सेवनमल्ले टी एस्टेट, ब्रुक बॉन्ड जैसे कई चाय बागान हैं। खास बात यह है कि आप इन चाय बागानों में रुक भी सकते हैं। केरल का राज्य पर्यटन विभाग यात्रियों को ये सुविधाएं देता है। यहां टाटा टी ने एक म्यूजियम भी बना रखा है, जहां चाय उगाने से लेकर उसे प्रॉसेस करने की पूरी प्रक्रिया देख सकते हैं। यहां पुरानी तस्वीरों के साथ एक वीडियो के जरिए चाय के इतिहास की पूरी जानकारी मिलेगी।कैसे पहुंचें मुन्नार, केरलमुन्नार से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट कोचीन है। जहां से पर्यटक आसानी से बस या टैक्सी द्वारा मुन्नार पहुंच सकते हैं। रेल मार्ग से पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन एर्नाकुलम है। बस मार्ग से भी आप केरल आसानी से पहुंच सकते हैं। ऊटी, तमिलनाडुदक्षिण भारत में पहाड़ों की रानी कही जाने वाली ऊटी हर तरह की खूबसूरती अपने आप में समेटे हैं। यहां पहाड़ों की ठंडक है, बगीचों की हरियाली और झीलों की ताज़गी भी, इसके साथ ही यहां कई एकड़ों में फैले चाय के बागान भी हैं जिनकी खुशबू लोगों पर अपना जादू चलाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। नीलगिरी की पहाड़ियों पर ऊंचे-नीचे चाय के बागान देखकर आपका मन करेगा कि यहीं इन हरी पत्तियों के झुरमुट के बीच बैठकर एक प्याली चाय तो पी ही लेनी चाहिए। ऊटी में पैदा होने वाली चाय की भारत में तो खपत है ही, ये अमेरिका और ब्रिटेन में भी निर्यात की जाती है। ऊटी से 17 किलोमीटर की दूरी पर कुनूर टी एस्टेट यहां का सबसे मशहूर चाय का बागान है। यहां आपको कई तरह की चाय की खुशबू के साथ जंगली फूलों की सुंदरता भी देखने को मिलेगी। इसके अलावा लैम्ब्स रॉक टी एस्टेट भी देखने लायक है। यहां से कोयम्बटूर के प्लेन्स भी साफ दिखाई देते हैं। खास बात ये है कि लैम्ब्स रॉक में आप चाय के साथ कॉफ़ी प्लान्टेशन भी देख पाएंगे। ऊटी का स्विट्जरलैंड कही जाने वाली केटी वैली का एक ट्रिप भी आप चाय के बागानों को देखने के लिए कर सकते हैं। कैसे पहुंचें ऊटी, तमिलनाडुऊटी का नजदीकी एयरपोर्ट कोयम्बटूर एयरपोर्ट है जो ऊटी से 85 किलोमीटर दूर है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद समेत देश के प्रमुख शहरों से नियमित फ्लाइट्स कोयंम्बटूर आती हैं। ऊटी से 40 किलोमीटर दूर स्थित मेट्टूपलयम ऊटी का नजदीकी रेलवे स्टेशन है। चेन्नई, मैसूर, बेंगलुरु समेत कई नजदीकी शहरों से नियमित ट्रेनें मेट्टूपलयम आती हैं। यहां से आपको ऊटी के लिए ट्वॉय ट्रेन मिल जाएगी। ट्वॉय ट्रेन का सफर आपकी ट्रिप को यादगार बना देगा। ट्रेन की कई जगह बगानों से होकर गुजरती है। आप चाहें तो तमिलनाडु स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की बस सर्विस के जरिए भी ऊटी पहुंच सकते हैं। इसके अलावा बेंगलुरु, चेन्नई और मैसूर जैसे पड़ोसी शहरों से भी सरकारी औऱ प्राइवेट बसें ऊटी के लिए चलती हैं।पालमपुर, हिमाचल प्रदेशउत्तर पश्चिमी भारत की चाय की राजधानी के रूप में जाना जाता है हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी का पालमपुर। कई एकड़ क्षेत्र में फैले चाय के बागान ही यहां के लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन हैं। यहां के इतिहास की मानें तो 1849 में उत्तर - पश्चिम सीमांत प्रांत में बॉटनिकल गार्डन के अधीक्षक डॉ. जेम्सन ने यहां चाय के बागानों की शुरुआत की थी। 1883 में चाय के कारण ही इसे पूरी दुनिया में पहचान मिली। बाजार में जो दरबारी, बागेश्वरी, बहार और मल्हार नाम से चाय बिकती है, वह यहीं की कांगड़ा किस्म की चाय होती है। ये सभी ब्रांड्स के नाम संगीत के रागों के नाम पर हैं। कांगड़ा की हवा, मिट्टी और बर्फ ढके पहाड़ों की ठंडक, ये सब मिलकर यहां की चाय को खास बनाते हैं और आपकी चाय के कप में जादू घोल देते हैं। पालमपुर आए हैं तो चाय के बागानों की सैर कभी भी मिस न करिएगा। आप यहां चाय बनाने का पूरा तरीका भी देख सकते हैं। चाय बागानों में एक झोपड़ी में गर्म कांगड़ा चाय के एक कप का स्वाद लेना भी आपके लिए बेहद खास साबित हो सकता है। और हां, इसकी एक तस्वीर लेना बिल्कुल मत भूलिएगा।कैसे पहुंचें पालमपुर, हिमाचल प्रदेशपालमपुर का निकटतम हवाई अड्डा गग्गल हवाई अड्डा है। जो यहां से 25 किमी की दूरी पर है। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट है जो यहां से 90 किलोमीटर की दूरी पर है। पालमपुर हिमाचल प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यहां के लिए सीधी बसें धर्मशाला, मनाली, कांगड़ा, चंडीगढ़ और शिमला से चलती हैं।टेमी टी एस्टेट, सिक्किमसिक्किम के टेमी चाय बागान की स्थापना यहां के राजा चोग्याल के शासनकाल में 1969 में हुई थी। कुछ समय बाद 1977 में बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन शुरू हो गया। यहां चाय बागान के रोजमर्रा के कामकाज को ठीक ढंग से रखा व किया जा सके, इसलिए 1974 में चाय बोर्ड की बनाया गया। कुछ समय बाद टेमी टी एस्टेट सरकारी उद्योग विभाग की सहायक कम्पनी बन गई। खास बात यह है कि यहां 440 एकड़ से भी ज़्यादा क्षेत्र में जैविक खेती करके लगभग 100 टन चाय उगाई जाती है। यदि बड़े चाय बागानों से मुकाबला किया जाए, तो यह पैदावार बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन इसकी गुणवत्ता और सुगंध ने भारत और दुनिया भर के चाय प्रेमियों का दिल जीत लिया है। जर्मनी, ब्रिटेन, अमेरिका और जापान टेमी चाय के प्रमुख खरीदार हैं। टेमी चाय को भारतीय चाय बोर्ड की तरफ से साल 1994 और 1995 के लिए "अखिल भारतीय गुणवत्ता पुरस्कार" भी मिल चुका है। यहां से कंचनजंगा की ऊंची चोटियां भी साफ दिखती हैं। वैसे तो यहां नवम्बर के महीने में चेरी के फूल भी देखने लायक होते हैं, लेकिन सालभर यहां का मौसम अच्छा ही रहता है। कैसे पहुंचें सिक्किमयहां का निकटतम हवाईअड्डा बागडोगरा है जो यहां से 118 किलोमीटर की दूरी पर है। देश के लगभग सभी बड़े हवाईअड्डों से यहां के लिए फ्लाइट मिल जाती हैं। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी है, जिसकी दूरी 114 किलोमीटर है। आगे की दूरी आप टैक्सी से तय कर सकते हैं। 

यूं ही नहीं ये जगह जन्नत कहलाती है

आशुतोष श्रीवास्तवये हसीं वादियां, ये खुला आसमां...। एआर रहमान की म्यूजिक पर बाला सुब्रमण्यम और एस चित्रा ने रोज़ा फिल्म के इस गाने को आवाज दी थी। अरविंद स्वामी और मधु पर फिल्माया गया मणिरत्नम की मूवी का गाना कश्मीर पर लगे आतंकवाद के ग्रहण की याद दिलाता है। आतंकवाद के चरम पर बनी यह मूवी हसीन वादियों में खौफ के पलों को अब भी ताजा कर देती है। तीन दशक तक आतंकवाद की आग में झुलसे कश्मीर में अब बहुत कुछ बदल चुका है। अब वहां न तो पत्थरबाजी की घटनाएं होती हैं और न ही पहले की तरह आतंकी घटनाएं। वादियों में टूरिज्म इंडस्ट्री पटरी पर लौट रही है और आपको बुला रही है।तो फिर देर किस बात की है? आप कोरोना के थमने का वेट मत कीजिए। जब भी मौका लगे धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की एक ट्रिप लगा लीजिए। नोट बुक में लिख लीजिए। जो मजा आपको कश्मीर की वादियों में मिलेगा, वैसा आपको आज तक नहीं आया होगा। बर्फ, झील, घाटियों में शोर करके बहती नदियां व झरने। सब कुछ तो है यहां। अरे ये क्या, आप तो बैग पैक करने में ही जुट गए। कश्मीर ट्रिप के लिए बैग तो पैक करिए, लेकिन टिकट तो बुक करवा लीजिए। आप कश्मीर तक फ्लाइट और सड़क से पहुंच सकते हैं। हम आपको वहां की खूबसूरत जगहें और पहुंचने के बारे में बातें पूरी डिटेल में बताएंगे।

100 साल से भी पुराने, खाने के ठिकाने

भारत के किसी किस्से से कम पुरानी नहीं है ज़ायके की कहानी और  इन व्यंजनों की खुशबू उतनी ही ताजी है जितनी बगीचे में लगे पुदीने में आती है। सदियों पुराने ज़ायके और खाने की ताज़ी-ताज़ी खुशबू को आप तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं भारत में कई दशकों से चले आ रहे कैफे और रेस्त्रां। पुराने दौर के ज़ायके को आप तक पहुंचाने वाले कुछ रेस्त्रां तो नए पुरानी यादों को खुद में समेटे नए अंदाज़ में ढल गए हैं, यानी यहां आपको विंटेज वाली फीलिंग तो आएगी ही, नए ज़माने वाली लग्जरी भी मिलेगी, वहीं इनमें से कुछ खाने के ठिकाने ऐसे हैं जो आज भी लोगों को सिर्फ अपने स्वाद और नाम से ही अपनी ओर खींचने में कारगर हैं। यहां आपको न तो लग्जरी फीलिंग मिलेगी और न ही कोई विंटेज थीम, हां स्वाद ऐसा होगा कि आप सड़क पर लाइन लगाकर भी इनके यहां खाना लेने को तैयार रहेंगे। तो चलिए हमारे साथ भारत के पुराने ज़ायके के सफर पर…

कोविड के चलते सोलो ट्रिप का है प्लान? ये जगहें आएंगी पसंद

कोरोना के कहर ने हम सबकी जिंदगी काफी बदल दी है। अब पहले जैसा कुछ नहीं रहा। घूमना-फिरना भी पहले से काफी बदल गया है। साल की शुरुआत में हुए एक सर्वे में ये बात सामने आई थी अब लोग ग्रुप में घूमने के बजाय अकेले घूमना ज्यादा पसंद हैं। सोलो ट्रैवलर्स तो पहले भी हमारे यहां काफी थे लेकिन अब ये संख्या पहले से भी ज्यादा बढ़ गई है। वैसे, इसमें रोमांच हैं, बेफ्रिकी है, बिना रोक टोक के खुद को एक्सप्लोर करने का सबसे बेस्ट तरीका है सोलो ट्रैवलिंग। अगर आप भी कोविड के बाद कहीं अकेले घूमने का प्लान बना रहे हैं तो  हम बता रहे हैं आपको भारत के उन बेस्ट डेस्टिनेशन्स के बारे में जहां आप आराम से अकेले घूम सकते हैं…

सुकून से भरी हैं ये जगहें, कुदरत भी है मेहरबान

जब भी घूमने की बात आती है तो लोग ऐसी जगहों पर जाना चाहते हैं जो मशहूर हैं। ये जगहें यकीनन खूबसूरत होती हैं लेकिन हर वक्त पर्यटकों से भरी रहती हैं। अगर आप लॉकडाउन के बाद कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, कोविड की टेंशन ले-लेकर परेशान हो गए हैं तो हम आपको  बता रहे हैं दक्षिण भारत के कुछ ऐसे गांवों के बारे में जहां आपको ढेर सारा सुकून मिलेगा। 

जूलरी से है प्यार? लॉकडाउन के बाद घूम लीजिएगा ये बाजार

जूलरी का नाम सुनते ही लोगों को लगता है कि अरे, इसका तो लेना-देना सिर्फ लड़कियों से है। अव्वल तो ये कि आजकल लड़के भी फैशन जूलरी के दीवाने हो गए हैं और दूसरा ये कि अगर लड़कियों का जूलरी से लेना है तो ये भी मान लीजिए कि देना तो लड़काें का भी काम है। इसलिए जो भी घूमने के शौकीन हैं, ये स्टोरी उन सबके लिए है। हम जब भी कहीं घूमने जाते हैं तो वहां की कुछ मशहूर चीजों की शॉपिंग किए बिना नहीं रह पाते। तो हम आपको बता रहे हैं ऐसी ही जगहों के बारे में जो घूमने के लिए तो बेहतरीन हैं ही यहां की जूलरी भी कमाल की होती है।

आम, जिनका स्वाद है सबसे ख़ास

फलों के राजा आम की आमद शुरू हो गई है। जून की दोपहर में चलने वाली लू के थपेड़े इसकी मिठास बढ़ा चुके हैं। अपने लाजवाब स्वाद के चलते दुनियाभर का पसंदीदा फल आम लोगों का लालच अपनी ओर बढ़ा रहा है। इस खास फल की पैदावार देश के कई अलग-अलग राज्यों में की जाती है, और यहां के कई राज्य ऐसे हैं जहां के आम पूरे देश में मशहूर हैं। ऐसे में यहां पैदा होने वाले आम की कुछ चुनिंदा लजीज किस्मों के बारे में जानना तो बनता ही है। आम के उत्पादन के मामले में भारत का दुनिया के किसी देश से कोई मुकाबला नहीं है। पूरे विश्व में पाई जाने वाली आम की 1400 किस्म में से भारत में ही 1000 किस्म के आम पाए जाते हैं। अब देश में आम की बात करें तो इसकी सबसे ज्यादा पैदावार यहां के उत्तर प्रदेश में होती है, लेकिन गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्य भी अपने-अपने आमों के लिए मशहूर हैं। 

लॉकडाउन के बाद इन जगहों की एक ट्रिप तो बनती है

फिलहाल हम सब घरों में बंद हैं और उस दिन के इंतजार में हैं जब ये कोरोना महामारी खत्म होगी और हम फिर से खुली हवा में सांस ले पाएंगे, अपनी पसंदीदा जगहों की सैर कर पाएंगे, कभी पहाड़ों पर चढ़कर तारे देखेंगे तो कभी समंदर से बातें कर पाएंगे, यूं ही किसी मोड़ पर रुककर गोलगप्पे खाएंगे। लेकिन कोई बात नहीं, हताश होने से भी क्या हासिल होगा। अभी अगर हम घूमने नहीं जा सकते तो क्या हुआ, घर बैठे शानदार जगहों की एक बकेट लिस्ट तो बना ही सकते हैं। आपका तो पता नहीं लेकिन हमने ये बकेटलिस्ट बना ली। लॉकडाउन के बाद इन जगहों की एक-एक ट्रिप तो हम करेंगे ही। चलिए आपको भी बता देते हैं कि हमने इस लिस्ट में किन-किन जगहों को शामिल किया है। 

अटल टनल ; नया रास्ता, नई मंजिलें

कड़कड़ाती सर्दी में अपनी कार या बाइक से लाहौल-स्पीति तक जाने का सपना न जाने कितनों ने देखा होगा, लेकिन कैसे जा पाते, वहां तक जाने का तो कोई सही रास्ता ही नहीं था। सर्दियों में तो 6 महीने ये घाटी भारी बर्फबारी की वजह से देश बाकी हिस्सों से कट जाती थी और जब जाने का रास्ता होता भी था उसमें भी लोगों को 15-20 घंटोें  तक जाम में फंसे रहना पड़ता था, पर अब ऐसा नहीं है, क्योंकि यहां अब घ्टनल बन गई है।कई आधुनिक सुविधाओं से लैस अटल टनल रोहतांग उन पर्यटकों के लिए वरदान की तरह है जो लाहौल की वादियों में घूमना चाहते थे। हिमाचल के कुल्लू जिले में मनाली से लेकर लाहौल-स्पीति के लाहौल तक जाती ये टनल 9.02 किमी लंबी है। 10 साल में बनकर तैयार हुई अटल टनल के रास्ते रोहतांग में बर्फ का दीदार करने वाले सैलानियों के वाहन अब जाएंगे और रोहतांग दर्रा होकर मनाली लौटेंगे। इससे उनका घूमने का मजा भी दोगुना हो गया है। रोहतांग दर्रे से गुजरने वाला मार्ग डबललेन है, मगर वनवे रहने से सैलानियों को फायदा होगा।

प्रकृति का खूबसूरत तोहफा हैं कारगिल के गांव

घूमने वालों के लिए दुनियाभर में ढेरों जगह मौजूद हैं। मगर, इनमें कुछ खास ऐसी जगह भी हैं जिन्हें शब्दों में परिभाषित नहीं किया जा सकता है। उस क्षेत्र की खूबसूरती देखकर हर किसी का मनमोह जाता है। कुछ जगह ऐसी होती हैं जो कि अपनी तस्वीरों के जरिए ही लोगों को आकर्षित कर लेती हैं। इन्हीं जगहों में शामिल हैं लेह और लद्दाख। लेह में ही स्थित है वीर योद्धाओं के शौर्य का बखान करने वाली कारगिल चोटी। 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध के बाद चर्चा में आई यह चोटी इस समय पर्यटन का मुख्य आकर्षण बन चुकी है। लेह-लद्दाख आने वाला हर शख्स कारगिल जरूर आना चाहता है। आइए हम आपको बताते हैं कि ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों और नीले रंग की दिखने वाली झीलों के आसपास कौन-कौन से खूबसूरत ठिकाने छिपे हुए हैं।

पर्यटन के लिए खुल गए हैं ये राज्य, आप भी कर लीजिए तैयारी

मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। कोरोना महामारी का खतरा कम नहीं है। हर दिन नए मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन जिंदगी अब पुराने ढर्रे पर लौटने लगी है। लोग सुरक्षा मानकों के साथ घर से निकलने लगे हैं। हम भी धीरे-धीरे इसके साथ जीना सीख रहे हैं। इसी के साथ कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने पर्यटकों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। आप भी जानिए उन राज्यों के बारे में और अगर पूरी सुरक्षा के साथ घूमने जा सकते हैं तो जरूर जाइए।

जोगेश्वरी गुफा: मंदिर से जुड़ी आस्था

एक तरह से महाराष्ट्र गुफाओं का केन्द्र कहा जा सकता हैं। यहां छोटी-बड़ी मिलाकर तमाम गुफाएं हैं। जिनमें अजंता-एलोरा की गुफाएं तो पूरे विश्व में अपनी शानदार वास्तुकला के चलते प्रसिद्ध हैं। महाराष्ट्र में जोगेश्वरी गुफा मुंबई शहर के गोरेगांव स्टेशन से करीब 30 किलोमीटर दक्षिण में अंबोली गांव में मौजूद है। ये एक तरह का गुफा मंदिर भी है। इसमें प्रवेश करते ही आपको मूर्तियां देखने को मिल जाएंगी। इसमें तमाम मूर्तियां जोगेश्वरी माता, हनुमान और गणेश भगवान की हैं।धार्मिक महत्व के चलते भक्त इस गुफा में अपनी ओर से भी मूर्तियां स्थापित कर देते हैं। गुफा के अंदर आने वाले दर्शक इसकी भव्यता देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं। गुफा के अंदर बने विशाल स्तम्भ भी हैं, जिनके ऊपर गुफा टिकी हुई है। बताया जाता है कि यह गुफा करीब 1500 साल पुरानी है। समय का प्रभाव इस गुफा पर अधिक पड़ा है, जिसकी वजह से अधिकांश मूर्तियां अपने प्राचीन स्वरूप में नहीं बची हैं।

नागालैंड : जिधर नजर घुमाएंगे बस खूबसूरती ही दिखेगी

यहां हरियाली है, खूबसूरत वादियां हैं, मन को मोहने वाला सनराइज और सनसेट है। अगर एक बार आप यहां आएंगे तो यकीन मानिए कई खूबसूरत नजारे और यादों को लेकर ही वापस जाएंगें। ये जगह अपने अंदर कुदरती खूबसूरती के साथ-साथ रोचक इतिहास को भी समेटे हुए है। यहां कई तरह की जनजातियां हैं जिनका रहन-सहन, खान-पान हमसे काफी अलग है, तो बहुत कुछ नया है देखने को, समझने को और महसूस करने को। 

ताजमहल के अलावा भी आगरा के पास और बहुत कुछ है...

ताजमहल का दीदार करने पूरी दुनिया से लोग यूपी में आते हैं। इसकी बेमिसाल खूबसूरती का ही असर है कि जो एक बार इसको नज़र भर देख लेता है उसकी निगाहें इस पर टिक सी जाती हैं। सफेद चमकते पत्थरों पर की गई अदृभुत नक्काशी इसे दुनिया की बेजोड़ इमारतों में से एक बनाती है लेकिन अगर आप आगरा घूमने जा रहे हैं तो सिर्फ ताजमहल का दीदार करके ही अपना ट्रिप खत्म न करिएगा। इसके आस—पास ऐसे बहुत से टूरिस्ट डेस्टिनेशन हैं जो आपको पसंद आ सकते हैं। 

धरोहरें जो यूपी को बनाती हैं बाकी राज्यों से अलग

भारत की विरासतें दुनिया भर में अपनी अद्भुत बनावट और महत्व के कारण फेमस हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में कोई न कोई ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है, जो न केवल पर्यटकों के सामने बरसों पुराने इतिहास को दोबारा दोहराती हैं बल्कि अपनी खूबसूरत कलाकृतियों से उनको अपना कायल भी कर लेती हैं। यूपी भी उन राज्यों में शामिल है, जहां अनेक संस्कृतियां और परंपराएं पली-बढ़ी हैं। इस राज्य ने कई धरोहरों को बड़े सलीके से संभाल कर रखा है। फिर वो हर धर्म से परे, बेशुमार मोहब्बत की निशानी ताजमहल हो या फिर नवाबों के शहर लखनऊ में वास्तुकला का सबसे नायाब उदाहरण इमामबाड़ा। ये सब मिलकर ही यूपी को खास बनाते हैं और पर्यटकों की पसंद भी।  

कश्मीर: ये हसीं वादियां देंगी आपके दिल को सुकून

कश्मीर की खूबसूरती का बखान कई शायरों और लेखकों ने किया है और ये बात आपको बिल्कुल सच लगेगी जब आप यहां आएंगें। इसके जर्रे जर्रे में खूबसूरती समाई है, कश्मीर की खूबसूरत वादियों में आने के बाद आप को ये महसूस होगा कि यहां की हवाओं और पानी में भी गजब की खूबसूरती है। दूर-दूर तक फैली सफेद बर्फीली पहाड़ियां, खामोशी से खड़े देवदार और चीड़ के पेड़, वादियों में महकती केसर की खुशबू, थोड़ी-थोड़ी दूर पर किसी जेवर सी झिलमिलाती झीलें और झीलों के पानी पर तैरते हाउसबोट और शिकारों में बैठकर चांदनी रात में आसमान को निहराना, ये सब सुनकर ही कितना खूबसूरत लगता है। अब सोचिए सामने से ये कितना हसीन मंजर होगा। कश्मीर के रंग हर मौसम में अलग-अलग तरीके से दिल को सुकून देते हैं लेकिन जब भी यहां बर्फ पड़ती है तो इस जगह की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है, बर्फ की चादर पूरी तरह से जब इन वादियों को ढक लेती है तो वाकई ये जगह स्वर्ग ही लगती है।  

झरनों और गुफाओं की खूबसूरती को निहारना है तो आइए झारखण्ड

झारखण्ड का नाम आते ही दिमाग में कोयला खदानें और इस्पात कारखाना घूमने लगता है, लेकिन इन सबके अलावा भी यहां बहुत कुछ है देखने और घूमने को। जंगलों से घिरे हुए इस राज्य के पास अपार प्राकृतिक सौंदर्य है। यहां कई ऐसी खूबसूरत जगहें हैं, जहां पहुंचकर आपको मानसिक शांति मिलेगी। कहीं पहाड़ों से कल-कल की आवाज करके बहते हुए झरने हैं तो कहीं दूर तक खामोश बहती झीलों के पास जब शाम ढलती है तो नजारा बेहद खूबसूरत होता है। दूर-दूर तक फैली हरी-भरी पहाड़ियों के नजारे देखकर आप अपनी सारी टेंशन भूल जाएंगे। प्राकृतिक नजारों के साथ-साथ पुरानी गुफाएं, ऊंची पहाड़ियां और हवा के संग-संग बहती नदियां आपको अपनी तरफ बरबस ही खींच लेंगी। ये सब देखकर ऐसा लगता है कि झारखण्ड को कुदरत ने प्राकृतिक सौंदर्य तोहफे में दिया हो। तभी तो यह एक ही नजर में सभी को लुभा लेता है। वाइल्डलाइफ के शौकीनों के लिए भी यहां कई ऑप्शन्स मौजूद हैं जो आपको एक्सपीरिएंस के साथ फोटोग्राफी का भी बेहतरीन मौका देते हैं। इसके अलावा झारखण्ड की आदिवासी लोक-संस्कृति भी आपका मन मोह लेगी तो इस बार जब भी घूमने का प्लान बना रहे हों झारखण्ड को जरूर याद कीजिएगा।

सापूतारा: गुजरात का इकलौता हिल स्टेशन

अतुल्य भारत को आप जितना जानेंगे और देखेंगे उतना ही कुछ नया और अलग पाएंगे। अतुल्य भारत का कोना-कोना इसकी अद्भुत विरासतों की कहानियां बयां करता है। किसी भी दिशा में चले जाएं, कुछ न कुछ नया और अनदेखा जरूर मिल जाएगा। ऐसा ही एक नायाब ठिकाना है सापूतारा। सह्याद्रि पर्वतमाला पर बसे गुजरात के इकलौते खूबसूरत हिल स्टेशन। यहां पर दूर तक फैली पर्वतमाला की हरियाली, कल-कल बहते झरने और सड़कों के किनारे का मनोहारी दृश्य मोह लेंगे। किसी ने सच ही कहा है मंजिल से ज्यादा सफर सुहाना होता है। यह बात सापूतारा के रास्ते को देखकर आप खुद महसूस कर सकते हैं। अगर आप नेचर के बीच जाकर उसकी खूबसूरती का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो सापूतारा आपका स्वागत है।

हम्पी: वास्तुकला की नायाब धरोहर

वैसे तो कर्नाटक में घूमने की कई जगह हैं पर हम ज्यादातर मैसूर या बैंगलोर की ही बात करते हैं। कर्नाटक की हसीन वादियों में हर जगह खूबसूरती बिखरी हुई है। साफ सुथरे शहर मुझे हमेशा से ही अपनी ओर खींचते रहे हैं। जब भी कभी मौका मिलता है मैं घूमने निकल पड़ता हूं और इसीलिए इस बार मैंने हम्पी का टूर प्लॉन किया। धरोहरों का ये शहर अपने पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। यहां वास्तुकला के नायाब नमूने देखने को मिलते हैं। मंदिरों की वास्तुशैली में आपको पुराना इतिहास सहेजा हुआ दिखेगा।

दादरा नगर हवेली : पश्चिमी घाट का खूबसूरत ठिकाना

हमारे दिमाग में जब भी घूमने की बात आती है तो ठंडक में हम सभी का दिमाग ठहर जाता है गोवा, राजस्थान और दक्षिण भारत पर, लेकिन इस बार ग्रासहॉपर आपको एक ऐसी बहुत ही खूबसूरत जगह की सैर कराने जा रहा है, जहां पर जाकर आप अपने मन को शांति दे सकते हैं। भीड़-भाड़ से कोसों दूर इस जगह के बारे में आपने भी सुना होगा और आप वहां की खूबसूरती से वाकिफ भी होंगे। जी हां, हम बात कर रहे हैं दादरा नगर हवेली की। महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ हिस्से को काटकर बनाया गया यह छोटा सा केंद्रशासित प्रदेश बहुत ही खूबसूरत है। चारों तरफ फैली आंखों को सुकून देने वाली हरियाली, कलकल करती नदियां, खूबसूरत पहाड़ों की श्रृंखला और शेरों की दहाड़ का अद्भूत संग अगर आपको देखना है, तो दादरा नगर हवेली आइए। चारों तरफ जंगलों से घिरे पश्चिमी घाट के इस खूबसूरत डेस्टिनेशन में आपको देखने के लिए बहुत कुछ मिलेगा। इस खूबसूरत डेस्टिनेशन पर भीड़-भाड़ न होने के कारण हर किसी को सुकून और शांति मिलती है। 

इस सर्दी करें बर्फ पर सैर

घुमक्कड़ों का मन तो हर मौसम में ही घूमने को तैयार रहता है फिर गर्मी हो या सर्दी। पहले भले ही लोग सर्दियों में पहाड़ों पर घूमने जाने से कतराते थे पर अब वे लोग बेसब्री से सर्दियों का इतजार करते हैं ताकि बर्फीली वादियों की सैर कर सकें और वैसे भी सर्दियों में घूमने का मजा बढ़ जाता है जब आप किसी हिल स्टेशन जाइए और वहां हर तरफ बर्फ की चादर बिछी हो, पहाड़ सफेद बर्फ से ढके हों, पत्तियों पर जगह-जगह बर्फ अटकी हो, घरों पर परतें बिछी हों तो खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं। आपका भी स्नो फॉल देखने का मन है और कंफ्यूज हैं कि जाएं तो जाएं कहां? तो हम कर देते हैं आपकी मदद, जहां आपको नेचुरल ब्यूटी के साथ-साथ बर्फ से खेलने का भी मौका मिले जैसे स्कीइंग, हाइकिंग, माउंटनीयरिंग, पैराग्लाइडिंग जैसे विंटर स्पोटर्स करने को मिले तो खुशी और भी बढ़ जाती है। ग्रासहॉपर के इस अंक में हम लाए हैं आपके लिए कुछ खास विंटर डेस्टिनेशंस जहां जाकर आप स्नो फॉल का मजा उठा सकें, बेफ्रिक होकर बर्फ में खेल सकें और भूल जाएं कुछ पल के लिए सारी टेंशन। तो फिर देर किस बात की? फटाफट पैक कर लीजिए गर्म कपड़े और निकल पड़िए हमारे साथ स्नो फॉल की खूबसूरती को महसूस करने। 

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