सैर दुनिया की

ज्वालामुखी के ऊपर बसे हैं ये खूबसूरत शहर

आज से लगभग 14.5 करोड़ साल पहले जुरासिक युग के अंत के पांच प्रमुख कारणों में से एक ज्वालामुखियों में हुए विस्फोट को भी माना जाता है। ज्वालामुखियों में विस्फोट कई बार परमाणु बम जितने शक्तिशाली और विनाशकारी भी होते हैं। क्या आपको लगता है ऐसे विनाशकारी खतरों के बीच कोई शहर बस सकता है? अगर आपका जवाब न है, तो आपको जानकार आश्चर्य होगा कि दुनिया के कई ऐसे शहर हैं जो ज्वालामुखियों के नज़दीक आबाद हैं। यहां की रौनक तो देखते ही बनती है।आखिर लोग ज्वालामुखी जैसी खतरनाक जगहों पर क्यों बसे हुए हैं?  "हम अक्सर ज्वालामुखियों को एक खलनायक के रूप में देखते हैं, पर उनको देखने का ये सही नजरिया नहीं है।" ये शब्द हैं अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वे की रिसर्चर सारा मैकब्राइड के। सिर्फ इसलिए कि एक ज्वालामुखी मौजूद है, ये जरुरी नहीं कि ये विनाशकारी ही हो। यहां तक कि बहुत से लोग सिर्फ अपने अस्तित्व के लिए ज्वालामुखियों पर निर्भर हैं। ज्वालामुखी के भूतापीय ऊर्जा से आस-पास के समुदायों अपने तकनीकी सिस्टम को आसानी से ऑपरेट कर पाते हैं। माना जाता है कि सक्रिय ज्वालामुखियों के पास की मिट्टी अक्सर खनिज से भरपूर होती है जो खेती के लिए फायदेमंद होती है। आइए आपको हम कुदरत के इसी खजाने की सैर पर ले चलते हैं। 

वनवास के समय इन जगहों में रहे थे श्री राम

भगवान श्री राम ने सीता जी और लक्ष्मण जी सहित अपने जीवन के 14 साल वनवास में गुजार दिए। अयोध्या से जब तीनों निकले तो उन्हें नहीं पता कि कहां जाना है, कहां रहना है और क्या करना है। उनके मन में उस वक्त यह विचार था कि उन्हें अपने पिता के वचन को किसी भी हाल में पूरा करना है और जीवन के आने वाले 14 साल वन में बिताने के बाद ही वापस अयोध्या लौट कर आना है। भले ही घर से निकलते वक्त उन्हें नहीं पता था कि उन्हें कहां जाना है, लेकिन अपने इन 14 वर्षों के काल खंड में वे जहां भी गए, जहां भी रुके, सभी जगहें पवित्र और अविस्मरणीय बन गईं। कहते हैं कि अपने वनवास के दौरान श्री राम लगभग 200 जगहों पर गए और रुके। हम आपको बताएंगे उन कुछ प्रमुख जगहों के बारे में जहां वनवास के दौरान प्रभु श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी गए थे…श्रृंगवेरपुर वाल्मीकि रामायण के अनुसार, अपने वनवास के लिए अयोध्या से निकलने के बाद राम जी सबसे पहले अयोध्या से 20 किलोमीटर दूर तमसा नदी के तट पर पहुंचे थे। इसके बाद नदी पार करके वे प्रयागराज से 20-22 किलोमीटर दूर निषादराज गुह के राज्य श्रृंगवेरपुर पहुंचे। यहीं गंगा के तट पर उन्होंने केवट से गंगा पार करने को कहा था। रामायण काल में सिंगरौर को ही श्रृंगवेरपुर कहा जाता था। प्रयागराज से उत्तर-पश्चिम की ओर लगभग 35 किलोमीटर दूर यह जगह है। कहते हैं कि जब श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण जी यहां घाट पर पहुंचे थे तब वहां नाव वालों ने उन्हें नदी पार कराने से मना कर दिया था। इसके बाद स्वयं निषादराज गुह वहां आए और उन्होंने श्रीराम से कहा कि अगर वे उन्हें अपने पैर धोने का अवसर देंगे तो वह उन्हें नदी पार करा देंगे। श्रीराम ने उनका निवेदन मान लिया और निषादराज से वनवास की वापसी में उनके घर आने का वादा करके वह तीनों यहां से आगे चले गए। इस घटना से जोड़ने के लिए इस स्थान का नाम 'रामचुरा' रखा गया है। इस जगह पर एक छोटा सा मंदिर भी है। हालांकि इस मंदिर का कोई ऐतिहासिक या सांस्कृतिक महत्व नहीं है, लेकिन यह जगह अब पर्यटकों को भा रही है।कुरई श्रृंगवेरपुर की नदी के दूसरी छोर पर कुरई गांव है। मान्यताओं के अनुसार, श्रृंगवेरपुर से नदी पार करने के बाद राम जी इसके दूसरे छोर पर कुरई में नाव से उतरे थे और आगे के सफर की ओर बढ़े थे। इस गांव में एक छोटा-सा मन्दिर भी है, जो स्थानीय श्रुति के अनुसार उसी जगह पर है जहां गंगा को पार करने के बाद राम, लक्ष्मण और सीता जी ने कुछ देर विश्राम किया था। कुरई में नाव से उतरने के बाद श्रीराम प्रयागराज पहुंचे और वहां से यमुना को पार कर उन्होंने अपना अगला पड़ाव चित्रकूट को बनाया। चित्रकूटराजा दशरथ की मृत्यु के बाद जब भरत अपनी सेना लेकर भगवान राम से मिलने जिस जगह पहुंचते हैं, वह चित्रकूट थी। यहीं से वह श्रीराम से उनकी चरण पादुकाएं मांगते हैं और उन्हें ही सिंहासन पर रखकर राज्य चलाने की प्रतिज्ञा लेते हैं। मान्यताओं के अनुसार, चित्रकूट में कामदगिरि भव्य धार्मिक स्थल है जहां भगवान राम रहा करते थे। इस स्थान पर भरत मिलाप मंदिर भी है। तुलसीदास ने भी अपनी रचना में चित्रकूट का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है - चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़तुलसीदास चंदन घिसत, तिलक देत रघुबीर

इंडोनेशिया देगा 5 साल का डिजिटल वीजा, स्टेकेशन करने वालों का होगा फायदा

कोरोना के आने के बाद से कई कंपनियां वर्क फ्रॉम होम को वरीयता दे रही हैं। अभी तक लोग वेकेशन में ही कहीं घूमने जाते थे, लेकिन अब एक नया टर्म स्टेकेशन भी चल रहा है। यानि जिन लोगों को वर्क फ्रॉम होम मिला है, वे अब किसी एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर जाकर महीनों रुक रहे हैं और इसे नाम दे रहे हैं स्टेकेशन। कई देशों के यात्रा और पर्यटन विभाग भी यात्रियों को रिमोट-वर्क-फ्रॉम-होम यानी स्टेकेशन देकर अपने यहां आने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इन्हीं में अब इंडोनेशिया का भी नाम जुड़ गया है जो लोगों को पांच साल के वीजा के साथ डिजिटल वर्क की सुविधा दे रहा है।इंडोनेशिया अब घर से काम करने वाले लोगों के लिए एक नया वीजा कार्यक्रम शुरू कर रहा है। जिससे आप बाली में लंबे समय तक रह सकते हैं और घूमने के साथ-साथ काम का भी मजा ले सकते हैं। ये देश जल्द ही पांच साल के लिए डिजिटल वीजा शुरू करने जा रहा है। यहां सरकार ने क्वारंटीन रूल तो हटा ही दिया है, इसके लिए यात्रा से जुड़े जो प्रतिबन्ध थे, वे भी हटा लिए गए हैं। अब जब कई दिग्गज कंपनियां वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दे ही रही हैं तो इंडोनेशिया का ये नया डिजिटल वीजा प्रोग्राम स्टेकेशन करने वालों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इस नए वीजा प्रोग्राम पर इंडोनेशियाई पर्यटन मंत्री सैंडियागा ऊनो का कहना है कि खेल आयोजन, पांच साल का वीजा कार्यक्रम और इकोलॉजिकल टूरिज्म घर से काम करने वाले लोगों के लिए शुरू किया जा रहा है। इनसे लगभग 3.6 मिलियन (लगभग 36 लाख) अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को यहां वापस लाने में मदद मिलेगी। "इससे इंडोनेशियाई लोगों के लिए 10 लाख (10 लाख) से अधिक नौकरियां शुरू करने में मदद मिलनी चाहिए,"। सरकार ने कहा इंडोनेशिया को छोड़कर किसी अन्य देश से अगर आप कमा रहे हैं, तो आपको यहां किसी भी तरह के टैक्स के भुगतान से छूट दी जाएगी। ये कदम लोगों को काफी आकर्षित करेगा।

समंदर के ये किनारे हैं बहुत खूबसूरत

अगर आपको समंदर की उठती-गिरती लहरें पसंद हैं। इसके किनाराें पर समय बिताना अच्छा लगता है तो ये स्टोरी आपके लिए है। हम आपके लिए ढूंढ कर लाए हैं दुनिया भर के समंदरों में से इसके सबसे सुंदर किनारे। 

विएना : संगीत और संस्कृति का ठिकाना

रिपब्लिक ऑफ ऑस्ट्रिया की राजधानी और यूरोप के सबसे सुंदर शहरों में से एक है वियना। यहां की इमारतों का आर्किटेक्चर, कमाल का ओपेरा संगीत और गलियों में बने रेस्तरां व कैफे एकदम दिल लुभाने वाले हैं। अपने इतिहास को आज भी खुद में जिंदा किए इस शहर में आपको बीते वक्त की झलक हर जगह दिखाई देगी। दानुबे नदी के किनारे बसा वियना सदियों से पूर्वी और पश्चिमी यूरोप का प्रवेश द्वार रहा है। आज यह देश का सबसे मजबूत आर्थिक और सांस्कृतिक ठिकाना है।

ये है दुनिया का पहला गोल्ड प्लेटेड होटल, देखिए शानदार तस्वीरें

हाल-फिलहाल तो कोरोना के चलते विदेश यात्रा करना सुरक्षित नहीं है लेकिन आने वाले समय में जब सब ठीक होगा तब धीरे-धीरे एक बार फिर लोग दुनिया देखने के अपने शौक को पूरा करने के लिए निकल पड़ेंगे। अगर आप भी कोरोना के बाद वाली अपनी बकेट लिस्ट में घूमने वाली कुछ जगहों के नाम शामिल कर रहे हैं तो इस होटल को भी उसमें शामिल कर लीजिए। 

लॉकडाउन में हो रहे हैं बोर तो करें ऑनलाइन इन म्यूजियम्स की सैर

कोरोना वायरस के बाद लॉकडाउन के चलते सभी पर्यटक स्थलों को बंद कर दिया गया था। अब जब पर्यटक स्थल खुलेंगे तो भी लोगों को विशेष ध्यान रखना होगा। लॉकडाउन के समय जब आप अपने घरों से ज्यादा घूमने फिरने नहीं जा सकते और बोर हो रहे हैं तो क्यों न घर में बैठकर कुछ ज्ञान बढ़ाया जाए। इस समय आप चाहें तो अपनी बोरियत को दूर करने और घुमक्कड़ी मन को शांत करने के लिए कुछ खास संग्रहालयों की वर्चुअल सैर कर सकते हैं। इससे आपका मनोरंजन भी होगा और जानकारी भी बढ़ेगी।आइए आपको लेकर चलते हैं कुछ ऐसे ही खास संग्रहालयों की ऑनलाइन सैर कराने-

घर बैठे देखें दुनिया की शानदार स्ट्रीट आर्ट

शहरों के रंग सिर्फ किताबों (Books) में ही नहीं मिलते बल्कि वहां की गलियों और दीवारों और स्ट्रीट्स पर भी मिलते हैं। फिर चाहे वो बर्लिन की स्ट्रीट आर्ट (Street Art) हो या फिर कुंभ के दौरान प्रयागराज की गलियों में की गई कलाकारी हो। यह आर्ट महज चित्र नहीं हैं बल्कि उस शहर की संस्कृति और वहां के मिजाज के बारे में बताते हैं। घूमने के शौकीन यह बात अच्छी तरह से जानते हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग घूमने के लिए उन जगहों का चुनाव करते हैं, जहां स्ट्रीट आर्ट (Street Art) का मजा लिया जा सके। तो इस लॉकडाउन (Lockdown) के समय अगर आप वहां नहीं जा सकते तो हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप दुनियाभर की शानदार स्ट्रीट आर्ट्स का घर बैठे मजा ले सकते हैं।

World Book Day/ विश्व पुस्तक दिवस पर जानें मानचित्र और ऐटलस का सफर

किताबें, सैर कराती हैं दुनिया की। फूलों की, पत्तियों की, नदियों की, झरनों की, पहाड़ की, आसमान की, ज्ञान की, विज्ञान की, बदूकों की, तोपों की, बम और रॉकेटों की भी। अद्भुत, अनोखा, अनकहा और रोमांचक अहसासों से हमारे अंदर  निर्माण कराती हैं एक नए संसार का। पर क्या आपने सोचा है कि पहले दुनिया की सैर कैसे होती थी। वो नदी, झरने, पर्वत और रेगिस्तान के बारे में कौन बताता था। आज से लगभग 500 साल पहले जब गूगल (Google) नहीं था, सैटेलाइट नहीं थे और ऐटलस की किताब नहीं थी तो कैसे पता चलता था कि फलां देश समुद्र किनारे बसा है या फिर रेगिस्तान पर। आज तो बिना भटके हम फर्राटा भरते और कदम गिनते हुए अपनी मंजिल तक पहुंच जाते हैं लेकिन पहले कैसे पता चलता था कि कितने महाद्वीप हैं, कितने समुद्र हैं, लंदन कहां है, पेरिस किस चिड़िया का नाम है, अमेरिका कहां है, चीन कहां और रशिया कितना विशाल है। इन विभिन्न जगहों को खोजने के दौरान कितना भटकना पड़ता था? आज विश्व पुस्तक दिवस (World Book Day) पर हम आपको बताएंगे विश्व के पहले मानचित्र (Map) और किताब की शक्ल लेते ऐटलस के बारे में।

विदेश नहीं गए तो क्या हुआ, ये जगहें कर देंगी कमी पूरी

कई बार हॉलीवुड फिल्मों में खूबसूरत लोकेशन्स देखकर हमारा मन उस जगह घूमने जाने को करने लगता है, लेकिन हमारा बजट सारे अरमानों पर फेर देता है, ऐसी परिस्थिति में मायूस होने की कोई जरूरत नहीं है। हमारे देश में भी कई ऐसे राज्य और शहर हैं जिनकी इमारतों और जगहों में विदेशी आर्किटेक्चर की पूरी झलक दिखती है, सबसे खास बात यह है कि यहां जाने पर आपकी जेब का बोझ भी नहीं बढ़ेगा। विदेश जाकर घूमने से पहले क्यों न अपने देश की इन खूबसूरत जगहों को एक्सप्लोर कर लिया जाए। यहां कोई शहर इटैलियन स्टाइल को अपनाए है तो किसी ने हूबहू फ्रेंच कॉलोनियां बसा ली हैं। आप एक बार अगर यहां पहुंच गए तो यकीनन विदेश न घूम पाने का मलाल जरूर कम हो जाएगा। तो फिर कर लीजिए तैयारी हमारे साथ एक ऐसे सफर की जो आपको अपने ही देश में विदेश की यात्रा का अनुभव कराएगा।

अनोखे और खूबसूरत ब्रिजेज को देखकर आप भी हो जाएंगे हैरान

हम जब घूमने का प्लान बनाते हैं तो वहां कौन-कौन सी जगह एक्सप्लोर कर सकते हैं, ज्यादा फेमस, ज्यादा खूबसूरत या फिर कोई ऐसी जगह जो हैरान करने वाली हो, जिसे देखकर आप अपने दांतों तले उंगली दबा लें और सोचने पर मजबूर हो जाएं कि आखिर ये बना कैसे होगा। दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां ऐसे अजीबो-गरीब पुल हैं जो न सिर्फ बने ही हैरान करने वाले अंदाज में हैं बल्कि बहुत ही खूबसूरत भी हैं। ग्रासहॉपर के इस अंक में हम आपको बताने जा रहे हैं दुनिया के कुछ ऐसे ही हैरतअंगेज पुलों के बारे में। कोई ब्रिज फ्लैट्स के बीच से होकर गुजर रहा है तो कोई जंगलों में पेड़ों को जोड़ रहा है। कुछ तो ऐसे भी हैं जिन्हें देखकर ऐसा लगता है मानो डराने के लिए ही बनाए गए हों। 

गायब होने की कगार पर हैं ये खूबसूरती के ये खजाने

घूमने के शौकीन नई-नई जगहों की तलाश करते रहते हैं। कई घुमक्कड़ों ने नई-नई जगहों की तलाश की है, लेकिन नई जगहों की तलाश के साथ ये जानना भी जरूरी है कि कई पुरानी जगहें ऐसी हैं जो अब गायब होने के कगार पर हैं। आपको शायद इनका जानकर यकीन न हो, लेकिन माना ऐसा ही जा रहा है। इससे पहले कि ये घूमने के ये खूबसूरत से ठिकाने गायब हो जाएं, एक बार आप भी यहां घूम आएं।

हॉन्गकॉन्ग में है खूबसूरती का खजाना

हॉन्ग कॉन्ग में धार्मिक लोगों के लिए मंदिर हैं, तो शॉपिंग के शौकीनों के लिए शानदार बाजार, पार्टी गोअर्स के लिए बेहतरीन नाइट लाइफ जीने के ठिकाने, खाने के दीवानों के लिए कमाल का खाना यहां सब कुछ है। चाहे कला गांवों में हस्तशिल्प, कलाकृतियों और अन्य चीजों को खरीदें, ‘डिंग थिंग’ ट्राम की सवारी का मजा लें या अपने बच्चों को डिज्नीलैंड में शानदार समय बिताते और मस्ती करते देखें। कपल हैं तो कैंडल लाइट डिनर के साथ समंदर के किनारे कुछ सुकून के पल बिताएं, या साथी की बाहों में बाहें डालकर घूमें।  यहां हर किसी के लिए कुछ न कुछ खास है। हॉन्ग कॉन्ग में घूमना लोगों के लिए एक कभी न भूलने वाला एक्सपीरियंस हो सकता है। ये शहर हर साल लाखों पर्यटकों को अपने यहां बुलाकर इस तरह के आकर्षण से बांध लेता है कि जब लोग यहां से जाएं तो दोबारा आने की इच्छा साथ ले जाएं। भारतीयों के लिए यहां जाना आसान इसलिए भी है क्योंकि उन्हें हॉन्ग कॉन्ग जाने के लिए वीजा की जरूरत नहीं पड़ती। भारतीयों को यहां वीजा ऑन अराइवल की सुविधा मिलती है, बस आपके पास पासपोर्ट होना चाहिए। 

हॉन्ग कॉन्ग : यहां सबके लिए कुछ खास है

आसमान को छूती इमारतें, भीड़-भाड़ वाली सड़कें, चारों तरफ बिखरी रोशनी, मजेदार खाने के साथ ही ऐसा बहुत कुछ है जो हॉन्ग कॉन्ग को घूमने के लिए लोगों की पसंदीदा जगहों में शामिल करता है। आप चाहे कला प्रेमी हों या इतिहास प्रेमी, संस्कृति प्रेमी हों या प्रकृति प्रेमी, हर स्वाद, मूड और इच्छा को अपील करने के लिए यहां कुछ न कुछ है। हॉन्ग कॉन्ग के टूरिस्ट डेस्टिनेशंस में आपको यहां की संस्कृति और इतिहास दोनों की झलक मिलेगी। 

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