डिवॉर्स टेम्पल के बारे में सुना है आपने? 600 साल पुरानी है कहानी

अनुषा मिश्रा 03-06-2023 06:25 PM Around The World
तलाक मंदिर, यह नाम अजीब लग सकता है लेकिन लगभग 600 साल पहले मात्सुगाओका टोकेई-जी कहे जाने वाले जापान के डिवॉर्स टेम्पल की स्थापना के पीछे के इरादे बिल्कुल अजीब नहीं थे। मात्सुगाओका टोकेई-जी, कामकुरा शहर, कानागावा प्रान्त, जापान में, कई घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं का घर रहा है।
यह पढ़कर आपको थोड़ा अजीब लग रहा होगा लेकिन उस वक़्त यह मंदिर ऐसी महिलाओं का सबसे बड़ा सहारा था। 
टोकीजी मंदिर के रूप में भी जाना जाने वाला यह ऐतिहासिक बौद्ध मंदिर उस समय से है जब महिलाओं के पास कोई अधिकार नहीं था और जापान में 'तलाक' के लिए कोई प्रावधान नहीं थे। उस समय, अपने प्रताणित करने वाले पतियों से दूर जाने वाली महिलाओं को इस मंदिर में शरण मिलती थी। जापान में महिलाओं के पास सीमित कानूनी अधिकार और कई सामाजिक प्रतिबंध थे। समय के साथ, मंदिर एक सुरक्षित ठिकाने और एक संस्था के रूप में लोकप्रिय होने लगा जहां दुखी महिलाएं सुरक्षा पा सकती थीं और अपमानजनक रिश्तों से अपनी आजादी पा सकती थीं। 

कब बना था मंदिर

मंदिर की स्थापना 1285 में कामकुरा शोगुनेट के आठवें रीजेंट होजो टोकीम्यून की पत्नी लेडी होरियुची ने अपने पति की मृत्यु के बाद की थी। लेडी होरियुची का जन्म 1252 में शक्तिशाली अदाची कबीले में हुआ था। जब वह एक साल की थीं, उनके पिता की मृत्यु हो गयी। इसके बाद होरियुची को उनके बड़े भाई अदाची यासुमोरी ने पाला था। होरियुची के पति, टोकिम्यून, का जन्म 1251 में हुआ था, वह कामाकुरा के अडाची निवास में बड़े हुए थे। दोनों एक-दूसरे को बचपन से ही जानते थे। होरियुची ने नौ साल की उम्र में टोकिम्यून से शादी की थी। अपनी शादी के बाद वे दोनों टोकिम्यून के अपने घर चले गए। लगभग सात साल बाद, टोकिम्यून शोगुन के लिए रीजेंट बन गए, और देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बन गए।

grasshopper yatra Image

लेडी होरियुची और होजो टोकिम्यून दोनों ज़ेन बौद्ध धर्म को खूब मानते थे और और ध्यान अभ्यास में हिस्सा लेते थे। जब 1284 में टोकिम्यून बीमार पड़ गए तो उन्होंने और लेडी होरियुची दोनों ने दीक्षा ली और भिक्षु बन गए। टोकिम्यून ने धार्मिक नाम होकोजी-डोनो डोको लिया, और लेडी होरियुची को बौद्ध नाम काकुसान शिडो दिया गया। कुछ ही समय बाद, टोकिम्यून की मृत्यु हो गई और लेडी होरियुची ने उनके सम्मान में एक मंदिर बनाने की कसम खाई।

लेडी होरियुची ने टोकेई-जी अपने पतियों से भागने वाली महिलाओं को शरण देने के इरादे से नहीं बनवाया था। हालांकि टोकेई-जी ने होरियुची के दिनों से ही महिलाओं को अपने पतियों को तलाक देने के लिए एक तंत्र प्रदान किया था। मंदिर बनने के पहले चार सौ वर्षों के दौरान  इसे काकेकोमी-डेरा, या शरणार्थी मंदिर के रूप में जाना जाता था। उस वक़्त कॉन्वेंट के कुछ प्रमुख मठाधीश मूल रूप से शरण लेने व अभयारण्य की तलाश में यहां पहुंचे थे।

और मिला तलाक़ का अधिकार

एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, लेडी होरियुची ने अपने बेटे सदातोकी से टोकेई-जी में एक मंदिर कानून बनाने के लिए कहा ताकि महिलाओं को अपने पति से अलग होने में मदद मिल सके। सदातोकी ने सम्राट को अनुरोध भेजा, जिसने इसे मंजूरी दे दी। शुरुआत में, मंदिर में सेवा की अवधि तीन वर्ष तय की गई थी। बाद में इसे घटाकर दो साल कर दिया गया। तोकुगावा अवधि के दौरान टोकेई-जी द्वारा 2,000 से अधिक तलाक दिए गए थे, लेकिन एक नए कानून के लागू होने के बाद, मंदिर ने 1873 में यह अधिकार खो दिया। तलाक के सभी मामलों को न्यायालय के नियंत्रित में दे दिया गया। 

grasshopper yatra Image

यह मंदिर विशेषकर महिलाओं के लिए एक पनाहगाह बना रहा और पुरुषों को 1902 तक इसमें प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी। इसके बाद जब एक पुरुष  ने मठाधीश का पद संभाला और टोकेई-जी एंगाकू-जी की देखरेख में एक शाखा मंदिर बन गया। बेल टॉवर के अलावा पूरा मंदिर, 1923 के कांटो भूकंप में तबाह हो गया था। बाद के दशक में मंदिर का धीरे-धीरे पुनर्निर्माण किया गया।

देखने लायक है जगह

आप मंदिर के परिवेश, सुंदर बगीचों और इसकी अच्छी तरह से संरक्षित वास्तुकला के प्यार में पड़ जाएंगे। हालांकि, फिलहाल मंदिर में तलाक से जुड़ा कोई भी काम नहीं होता लेकिन यह बीते युग से महिलाओं की दयनीय स्थिति का एक सुंदर स्मारक है। आज, मंदिर जापानी इतिहास में महिलाओं के लिए सशक्तिकरण और स्वतंत्रता के एक महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में खड़ा है।

आपके पसंद की अन्य पोस्ट

World Book Day/ विश्व पुस्तक दिवस पर जानें मानचित्र और ऐटलस का सफर

विश्व पुस्तक दिवस (World Book Day) पर पढ़ें कैसे पहले मानचित्र और ऐटलस का निर्माण हुआ

भूटान घूमने का बना रहे हैं प्लान? रॉयल हाइलैंड फेस्टिवल कर रहा है इंतज़ार

भूटान गासा में रॉयल हाईलैंड फेस्टिवल की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

लेटेस्ट पोस्ट

दुर्गा पूजा 2026 में बड़े बदलाव! महाअष्टमी को शराब पूरी तरह बैन, विसर्जन में डीजे म्यूजिक पर भी रोक

सरकार का मकसद है कि पूजा पारंपरिक, शांत और व्यवस्थित तरीके से मनाई जाए।

वाराणसी का वो अनोखा होटल जहां लोग मरने के लिए चेक-इन करते हैं, लेकिन सिर्फ 15 दिन रुक सकते हैं, वजह हैरान कर देगी!

वाराणसी में एक ऐसा अनोखा होटल है, जहां लोग घूमने-फिरने नहीं, बल्कि मरने के लिए आते हैं।

त्रियुंड ट्रेक पर नया नियम: कचरा वापस लाओ, वरना ₹500 जमा डूब जाएगा

अब ट्रेकर्स को ट्रेक शुरू करने से पहले ₹500 का रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट देना होगा।

इस हफ्ते आपके सफर पर असर डाल सकती है बारिश IMD ने इन इलाकों में अलर्ट जारी किया, आपके लिए ये बातें जानना है ज़रूरी

मौसम विभाग (IMD) ने 1 से 7 सितंबर के बीच कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है।

पॉपुलर पोस्ट

पुष्कर: उत्सवों को उत्साह से मनाती भगवान ब्रह्मा की ये नगरी

अरावली की पहाड़ियों से तीन ओर से घिरे राजस्थान के ह्रदय पुष्कर में एक अलग ही रंग का हिंदुस्तान बसता है। एक ऐसा हिंदुस्तान जिसे सैलानी सिर्फ देखने नहीं बल्कि उसे महसूस करने, जीने और इसकी आध्यात्मिकता में डूब जाने के लिए आते हैं।

वाइल्ड लाइफ के शौकीनों के लिए महाराष्ट्र है बेस्ट

प्लानिंग इस बार महाराष्ट्र के टाइगर रिजर्व्स को एक्सप्लोर करने की और एडवेंचर के साथ खूबसूरती को निहारने की।

भूटान घूमने का बना रहे हैं प्लान? रॉयल हाइलैंड फेस्टिवल कर रहा है इंतज़ार

भूटान गासा में रॉयल हाईलैंड फेस्टिवल की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

सितंबर में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये जगहें

हमारा देश इतना बड़ा है कि यहां हर महीने आपको घूमने के लिए कई सुंदर जगहें मिल जाएंगी।