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भारतीय पेपर मनी का दिलचस्प इतिहास बताता है यह म्यूजिमय, यहां है कमाल का कलेक्शन

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया दो कमाल के म्यूजियम चलाती है। पहला- मुंबई में (द मॉनेटरी म्यूजियम) और दूसरा - कोलकाता में (आरबीआई म्यूजियम), जो पैसे के इतिहास, मॉनेटरी ट्रांजेक्शन आदि का काम करते हैं। लेकिन अगर आप विशेष रूप से भारतीय रुपये के नोटों के बारे में जानना चाहते हैं तो आपको बंगलुरु के रिजवान रजाक म्यूजियम ऑफ इंडियन पेपर मनी का रुख करना चाहिए। 2020 में शुरू हुए इस म्यूजियम में भारतीय पेपर मनी और संबंधित सामग्री का बेहतरीन संग्रह है। यह रिजवान रजाक के पर्सनल कलेक्शन से बनाया गया म्यूजियम है, जो प्रेस्टीज ग्रुप के सह-संस्थापक और प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स के प्रबंध निदेशक हैं। 2012 में, रजाक ने 'द रिवाइज्ड स्टैंडर्ड रेफरेंस गाइड टू इंडियन पेपर मनी' नामक एक पुस्तक का सह-लेखन किया, जिसे तब से 'बाइबल फॉर इंडियन पेपर मनी' कहा जाता है। 2017 में, उन्होंने भारत में एक रुपये के नोट के जारी होने की 100 वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक दूसरी पुस्तक, 'वन रुपया - वन हंड्रेड इयर्स 1917-2017' लिखी। भारतीय पेपर मनी का उनका संग्रह आज दुनिया में सबसे व्यापक माना जाता है। 50 वर्षों की मेहनत से उन्होंने ये कलेक्शन बनाया है, जिसमें उनकी मेहनत और लगन साफ दिखती है। 

घूमने की कर लीजिए तैयारी, मध्य प्रदेश में खुल गए हैं सभी नेशनल पार्क्स

अगर लॉकडाउन  खुलते ही घूमने का प्लान बना रहे हैं तो ये आपके लिए अच्छी खबर है। मध्य प्रदेश में एक जून से सभी नेशनल पार्क एक महीने के लिए खुल गए हैं। मध्य प्रदेश के वन मंत्री विजय शाह ने कहा है कि कोरोना काल में प्रदेश के सभी बंद राष्ट्रीय उद्यान एक जून से 30 जून तक के लिए खोले जाएंगे।

कैलाश मानसरोवर यात्रा : धर्म, अध्यात्म और अनोखा सफर

कैलाश मानसरोवर यात्रा:आस्था के वैचारिक आयाम’ मशहूर लेखक ग़ज़ल गायक और नामी IAS डॉक्टर हरिओम की ताज़ा किताब है।इस किताब के ज़रिए उन्होंने 'यात्रा-आख्यान' विधा में बहुत कुछ जोड़ा-तोड़ा हैं।एक साहित्यिक तीर्थयात्री के बतौर हरिओम के पास वह स्वस्थ और साकांक्ष दृष्टिकोण है जिससे वह 'तीर्थयात्रा' को भी एक रम्य-आख्यान में बदल देते हैं। उनकी दृष्टि खुली और आलोचनात्मक है जिसके कारण वे तीर्थों के भूगोल में फैले व्यवसाय और कुव्यवस्था को भी सामने लाते हैं। आस्था शंका और तर्क से परे होती है जहाँ चिंतन और वैचारिकी का पूर्णत: समर्पण होता है। शायद इसीलिए आस्थावान भक्त अपने परलोक की चिंता में इहलोक के असहनीय कष्ट को झेल लेते हैं। हरिओम इस यात्रा में धर्म, अध्यात्म आदि पर न सिर्फ़ तार्किक दृष्टि से विचार करते हैं बल्कि समाज-मनोवैज्ञानिक विश्लेषण भी करते चलते हैं। उनके भीतर यह चिंता भी कायम है कि कैसे धर्म के 'धुंध और पीलेपन ने हमारे देश के सुंदर परिवेश का रंग चुरा लिया है।'यहाँ विकास और पर्यावरण के बीच के असंतुलन को भी बहुत शिद्दत के साथ रेखांकित किया गया है। कैलाश मानसरोवर तिब्बत में स्थित है जो अब चीन के अधीन है। हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार यह भगवान शिव का निवास स्थान है। यह हिन्दू के साथ-साथ बौद्ध, जैन और बोन तीनों धर्मों में पवित्र तीर्थ माना गया है। यात्रा में नेपाल की विपन्नता के सामने चीन की सम्पन्नता दिखती है लेकिन तमाम ऐसे सवाल हैं जो नेपाल और तिब्बत के सामाजिक आर्थिक जीवन के साझा सवाल हैं।भोले बाबा की जय' एक ऐसा वाक्य है जिसमें सारी अव्यवस्था ढँक जाती है। 'सेहत और सफाई का सवाल श्रद्धा और आस्था' के नीचे दब जाता है। इस यात्रा-आख्यान में रोमांच और रोचकता के साथ ही अद्भुत किस्सागोई है। नि:संदेह धार्मिक-आध्यात्मिक पक्ष के साथ ही भारत, नेपाल, तिब्बत और चीन के भूगोल, समाज, पर्यावरण, कूटनीति, विकास और सांस्कृतिक-राजनीतिक संबंधों को समझने में भी यह पुस्तक सहायक सिद्ध होगी।          कैलाश मानसरोवर यात्रा :आस्था के वैचारिक आयामलेखक-हरिओमअंतिका प्रकाशन दिल्ली मूल्य ३५० रुपए पृष्ठ-१४४किताब अमेजन पर भी उपलब्ध हैamazon.in/dp/B08Y74RGGXसीधे प्रकाशक से मंगवाने के लिए कृपया इस लिंक पर जाएँhttp://antikaprakashan.com/Author-Details.php?bid=Hariom

कोरोना के साथ टूरिज्म को पटरी पर लाने की तैयारी

देश में भले ही कोरोना वायरस का खतरा बढ़ रहा, लेकिन सरकार ने अनलॉक में सामूहिक कार्यक्रमों को छोड़कर लगभग सारी प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की छूट दे रखी है। केंद्र सरकार देश के लोगों की आर्थिक और मानसिक स्थिति को नॉर्मल करने के लिए लॉकडाउन में पुरजोर ढील दे रही है। वहीं, दूसरी तरफ केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने हाल ही में ट्वीट कर सभी स्मारकों को खोलने की सलाह दी है। उनके इस बयान के बाद अंदाजा लगाया जा रहा है कि जल्द ही देश में पयर्टन स्थल खुल जाएंगे। लम्बे समय से घरों में बंद रहे लोग कोरोना से निपटने की सावधानी को अपनाते हुए कई जगह पर सैर कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कि कोरोना वायरस के इस संकट में आखिर भारत के अलावा किस देश ने अपने यहां के लोगों के लिए पर्यटन खोल दिया गया है।

जल्द शुरू होगी अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा के इंतजाम पूरे

कोरोना वायरस से फैली महामारी की वजह से हर साल होने वाली अमरनाथ यात्रा पर रुकावटें लगती नजर आ रही थीं लेकिन अब ये यात्रा जल्द ही शुरू होने वाली है। हालांकि, प्रशासन पूरी तरह से अहतियात बरत रहा है। सैनिटाइजेशन का काम पूरा कर लिया गया है। इस बार गुफा में भगवान शिव के दर्शन करने के लिए भी हर दिन सिर्फ 500 यात्रियों को ही अनुमति दी जाएगी। अमरनाथ और वैष्णो देवी तीर्थस्थलों की तीर्थयात्रा के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्रियों जी किशन रेड्डी, जितेंद्र सिंह और गृह मंत्रालय और जम्मू और कश्मीर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक उच्च स्तरीय बैठक की। अमरनाथ यात्रा 21 जुलाई से शुरू होने की संभावना है। बैठक के बाद बताया गया कि इस वर्ष की तीर्थयात्रा सीमित तरीके से आयोजित की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, सिर्फ एक रास्ते से ही श्रद्धालुओं को जाने दिया जाएगा। बर्फ जमी होने की वजह से पहलगाम के रास्ते को अभी तक साफ नहीं किया जा सका है। ऐसे में इस साल बालटाल के रास्ते से ही श्रद्धालु दर्शन के लिए जा सकते हैं। हालांकि, इस पर आखिरी फैसला अगले हफ्ते लिया जाएगा। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये आयोजित हुई इस बैठक में जम्मू और कश्मीर के उप राज्यपाल जीसी मुर्मू, मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम, जम्मू और कश्मीर के संभागीय आयुक्तों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

अनलॉक 2.0 : इस तारीख से कर सकेंगे ताज का दीदार

ताजमहल व बाकी सभी संरक्षित स्मारक 6 जुलाई से पर्यटकों के लिए खोल दिए जाएंगे। इस बात की जानकारी केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने इस बात की जानकारी ट्वीट के जरिए दी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कोरोना की रोकथाम के लिए जारी सभी गाइडलाइंस जैसे थर्मल स्क्रीनिंग, फेस मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजर का इस्तेमाल आदि को सुनिश्चित करना आवश्यकत होगा। 

कर्नाटक टूरिज्म की पहल, कैम्परवैन में करिए राज्य की सैर

कैम्परवैन में पूरे भारत की रोड ट्रिप का सपना आप में से कई लोगाें ने देखा होगा। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच अब पूरे भारत की रोड ट्रिप तो फिलहाल संभव नहीं है, लेकिन कर्नाटक की सड़कों पर घूमते हुए आप यहां के प्रमुख पर्यटक स्थलों की सैर जरूर कर सकते हैं।कोरोना के कारण दुनियाभर के टूरिज्म सेक्टर को भारी झेलना पड़ रहा है, लेकिन कुछ राज्यों ने अब इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। इस तरफ पहल करते हुए कर्नाटक सरकार ने Caravan Tourism की शुरुआत की है। अब पर्यटक लग्जरी मोबाइल वैन में कर्नाटक के कु़छ फेमस टूरिस्ट प्लेसेज घूम सकते हैं।इस कैम्परवैन में चार लोगों के लिए कन्वर्टिवल बेड्स होंगे, एक वॉशरूम और एक किचन भी होगा। इसमें एक स्मार्ट टीवी और म्यूजिक सिस्टम भी मिलेगा। किचन में रेफ्रिजरेटर, फ्रीजर और माइक्रोवेव भी होगा। इस कैम्परवैन को कनार्टक स्टेट टूरिज्म डिपार्टमेंट कॉरपोरेशन (KSTDC) द्वारा उपलब्ध कराई गई जगहों पर पार्क किया जा सकेगा। Caravan में बिजली के लिए सोलर पावर का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए इसकी छत पर सोलर पैनल्स लगे हैं। टॉयलेट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें पानी का कम से कम इस्तेमाल हो। 

अब हवाई यात्रा के दौरान नहीं मिलेगी शराब

जो लोग हवाई यात्रा के दौरान शराब पीना पसंद करते हैं ये खबर उनके लिए है। कई एयरलाइन्स ने ये तय किया है कि वे अब अपने यात्रियों को हवाई यात्रा के दौरान शराब नहीं देंगी। यह फैसला कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए लिया गया है। ऐसा करने से यात्री और विमान के स्टाफ के बीच सम्पर्क कम होगा। जो लोग हवाई यात्रा के दौरान शराब पीना पसंद करते हैं ये खबर उनके लिए है। कई एयरलाइन्स ने ये तय किया है कि वे अब अपने यात्रियों को हवाई यात्रा के दौरान शराब नहीं देंगी। यह फैसला कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए लिया गया है। ऐसा करने से यात्री और विमान के स्टाफ के बीच सम्पर्क कम होगा। 

घर बैठे ट्रैवल करो और देखो अपना देश

साल 2020 सर्द चादर ओढ़े बेफिक्र आगे बढ़ रहा था, दो महीने से ज्यादा समय बीत चुका था। घूमने के शौकीन या तो छुट्टियां मनाकर लौट रहे थे या फिर गर्मी की छुट्टियों की प्लानिंग कर रहे थे। इस प्लानिंग के बीच कोराना वायरस (Corona Virus) ने देश और दुनिया में घुसपैठ की, जिससे सभी के प्लान पर ब्रेक लग गया। अब जबकि लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं, ऐसे में भारत की टूरिज्म मिनिस्ट्री (Tourism Ministry) ने लोगों को घर बैठे देश घुमाने का अनोखा तरीका निकाला है। टूरिज्म मिनिस्ट्री ने इंक्रेडिबल इंडिया (Incredible India) के बैनर तले देखो अपना देश (Dekho Apna Desh) नाम से ऑनलाइन सीरीज (Online Series) की शुरुआत की है। इसके तहत टूर ऑपरेटर्स (Tour Operators) विभिन्न राज्यों के अलावा कम चर्चित टूरिस्ट डेस्टिनेशन (Tourist Destination) और वहां की खासियत के बारे में विस्तार में बताएंगे। 

कोरोना के बाद ट्रैवल इंडस्ट्री में होंगे ये बदलाव

कोरोना काल के बाद क्या हम ट्रैवल (Travel) कर सकेंगे? अगर हां, तो कब, कैसे और किन जगहों पर। सवाल बड़े हैं और जटिल भी। कोरोना महामारी (Corona Pandemic) बढ़ने के साथ ही टूरिस्ट (Tourist) और ट्रैवल इंडस्ट्री (Travel industry) के सामने ऐसे कई सवाल मुंह बाए खड़े हैं। इसका जवाब यूं तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन अभी से अनुमान जरूर लगाया जा सकता है। कोरोना काल गुजरने के बाद ट्रैवल इंडस्ट्री में ट्रैवलर्स के स्वास्थ्य से लेकर परिवहन व अन्य चीजों में बदलाव आना मुमकिन है। तो आइये जानते हैं कि कोरोना महामारी ट्रैवल इंडस्ट्री में किस तरह के बदलाव लाएगी।

टूरिस्ट के लिए कोरोना वायरस फ्री सर्टिफिकेट जारी करेगा तुर्की

कोराना वायरस (CoronaVirus) के कहर से दुनिया भर में टूरिज्म इंडस्ट्री जूझ रही है। ऐसे में टूरिज्म सेक्टर को दोबारा से पहले जैसा बनाने के लिए तुर्की ने एक नया तरीका निकाला है। तुर्की अब अपने फेमस टूरिस्ट स्पॉट्स को कोविड फ्री सर्टिफिकेट (Covid Free Certificate) देगा, ताकि पर्यटकों को फिर से आकर्षित किया जा सके। इसकी जानकारी तुर्की के कल्चर और टूरिज्म मिनिस्टर नूरी इरसोय ने दी।

कोरोना से लड़खड़ा रहा अफ्रीका का वाइल्डलाइफ टूरिज्म

केन्या के शेल्ड्रिक वाइल्डलाइफ ट्रस्ट (SWT) में हाथी के अनाथ बच्चों को पहले की तरह ही बेफिक्र अंदाज में घूमते हुए देखा जा सकता है लेकिन इनकी अठखेलियों को देखने वाली टूरिस्टों की भीड़ गायब है, जो सामान्य दिनों में नजर आती थी। हाथी व जंगल में पाए जाने वाले अन्य जानवरों को देखने वाली भीड़ के गायब होने की वजह है कोरोना वायरस का प्रकोप। टूरिस्टों के न आने के चलते अब इनकी आमदनी भी बंद हो गई है।सील हुए बॉर्डर व एयरपोर्टकोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते ज्यादातर देशों ने अपने एयरपोर्ट बंद करने से लेकर बॉर्डर तक सील कर दिए हैं। इस वजह से अफ्रीका का वाइल्डलाइफ टूरिज्म सेक्टर मुश्किल में है। न सिर्फ कमाई के मामले में बल्कि विलुप्त होने की कगार पर खड़े जानवरों के बचाव के लिए चलाए जाने वाले प्रोजेक्ट भी रुक गए हैं। वाइल्डाइफ ट्रस्ट से जुड़े आधिकारियों का मानना है कि कोरोना वायरस के प्रभाव से अफ्रीका का वाइल्डलाइफ टूरिज्म सेक्टर महीनों नहीं बल्कि पूरे साल तक प्रभावित रह सकता है। यह अनिश्चिताओं से भरी इंडस्ट्री है, यही वजह है कि हम सभी इसे लेकर चिंतित हैं। 

आईआरसीटीसी ने 30 अप्रैल तक अपनी तीन ट्रेनों की बुकिंग रोकी

आईआरसीटीसी ने अपनी तीन प्राइवेट ट्रेनों का संचालन आगामी 30 अप्रैल तक निलंबित रखने का फैसला किया है। इन तीन प्राइवेट ट्रेनों में नई दिल्ली-लखनऊ के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस, मुंबई-अहमदाबाद तेजस और वाराणसी-इंदौर के बीच चलने वाली महाकाल एक्सप्रेस शामिल हैं। पहले इन ट्रेनों में टिकट की बुकिंग 25 मार्च से 15 अप्रैल तक बंद की गई थी। यह फैसला कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते लिया गया था। हालांकि, यह उम्मीद जताई जा रही थी कि 15 अप्रैल के बाद लोग इन ट्रेनों में सफर कर सकेंगे लेकिन देश में तेजी से फैलते वायरस के चलते बड़ी संख्या में संक्रमित होते लोगों को देखते हुए इसे 30 अप्रैल तक बंद रखने का फैसला लिया गया है।

भूटान घूमना चाहते हैं तो जुलाई से पहले कर लें प्लानिंग नहीं तो पड़ेगा महंगा

भारत और चीन के बीच हिमालय की गोद में बसे भूटान देश को अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। प्रकृति की हसीन वादियों के बीच यहां आकर पर्यटक आनंदित हो उठते हैं। अगर आप भी भूटान घूमना चाहते हैं, तो जुलाई से पहले की प्लानिंग कर लें। ऐसा इसलिए, क्योंकि भूटान जाने वाले भारतीयों को जुलाई से सतत विकास शुल्क (Sustainable Development Fee) के तौर पर 1200 रुपए देना पड़ेगा। इससे पहले यहां भारतीय पर्यटकों का प्रवेश नि:शुल्क था। आइए जानते हैं भूटान की खूबसूरत जगहों के बारे में।

अब मेघालय घूमना नहीं होगा आसान, सरकार से लेनी होगी परमिशन

मेघालय घूमने का प्लान बना रहे हैं, टिकट बुकिंग से लेकर सारी तैयारियां हो रही हैं तो आपको एक जरूरी बात याद करा दें, मेघालय सरकार ने पर्यटकों के लिए एक निर्देश दिया है जो कि आपको ज़रूर जानना चाहिए। मेघालय सरकार ने निर्देश दिया है कि अगर आप 24 घंटे से ज्यादा समय के लिए मेघालय में रहने वाले हैं, तो सरकार की वेबसाइट पर जाकर आपको खुद को पहले रजिस्टर करना होगा। ये जानकारी मेघालय के उपमुख्यमंत्री प्रेस्टन तिनसोंग ने दी थी। मेघालय सरकार ने अपने बचाव एवं सुरक्षा एक्ट, 2019 के 4 (ए) में संशोधन करते हुए बाहर से आने वाले लोगों के लिए ये निर्देश दिया है। इसके तहत आपको ऑनलाइन या फिर ऑफ़लाइन तरीके से सरकार को अपनी जानकारी देनी होगी।यही नहीं निर्देशों का पालन न करने पर भारतीय दंड संहिता (IPC) के अनुच्छेद 176 व 177 के तहत अधिकतम 6 माह की जेल का प्रावधान है। मेघालय के अलावा कुछ ऐसा ही नियम भारत के नागालैंड, अरुणांचल प्रदेश और मिज़ोरम में भी है, जिसे आईएलपी के नाम से जानते हैं। मेघालय के खासी छात्र संगठन पहले से ही इसकी मांग कर रहे थे। आदिवासी लोगों के अधिकारों के संरक्षण के लिए यह नियम लागू करना जरूरी था। 

एक अप्रैल से महंगी हो जाएंगी विदेश यात्राएं, अभी करा लें टिकट

घूमने के शौकीनों के लिए एक जरूरी खबर है अगर आप विदेश टूर का प्लान बना रहे हैं तो बता दें कि इस साल एक अप्रैल से विदेशी यात्राएं महंगी हो जाएंगी। नए वित्त वर्ष से विदेशी टूर पैकेज लेने और विदेश में किसी भी तरह का पैसा भेजना महंगा हो जाएगा। अगर कोई विदेशी टूर पैकेज खरीदता है या इंडियन करेंसी के बदले विदेशी करेंसी एक्सचेंज कराता है तो 7 लाख रुपए से ज्यादा की रकम पर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (टीसीएस) देना होगा। केंद्र सरकार ने बजट 2020 में आयकर की धारा 206सी में संशोधन कर टीसीएस लगाने का प्रस्ताव दिया है। इन विदेशी टूर पैकेज में भारत के बाहर किसी एक देश या कई देशों का टूर पैकेज शामिल हैं। इनमें ट्रैवल का खर्च, होटल में ठहरने का खर्च, बोर्डिंग, लॉजिंग समेत अन्य तरह के सभी खर्च शामिल होंगे। सरकार के इस प्रस्ताव के बाद अब विदेशों में पढ़ाई के लिए जाने से लेकर छुट्टियां मनाना सभी कुछ महंगा हो जाएगा।

उत्तराखंड: जंगल की खूबसूरती को देखिए ड्रोन कैमरे की नजर से

अगर आप उत्तराखंड के छह नेशनल पार्क, सात सेंचुरी और चार कंजर्वेशन रिजर्व में से कहीं जाने का प्लान कर रहे हैं, तो आपके लिए एक खुशखबरी है। अब आप उत्तराखंड के जंगलों में बहुत ही करीब से जानवरों को देख पाएंगे। जी हां, पर्यटकों की मांग को देखते हुए जंगलों में ड्रोन कैमरे को उड़ाने की परमिशन मिल गई है और अब पर्यटक ड्रोन कैमरे की नजर से कुदरती नजारों और वन्यजीवों का दीदार कर सकेंगे। अपनी खूबसूरती और वाइल्ड लाइफ के लिए फेमस उत्तराखंड की वादियों में अगर आप घूमने जा रहे हैं, तो इस बार आपका मजा दोगुना हो सकता है। यहां के जंगलों की प्राकृतिक खूबसूरती के साथ ही साथ आप ड्रोन कैमरे से अठखेलियां करते हुए जानवरों को भी देख सकेंगे और सिर्फ देख ही क्यों, इन लम्हों को कैमरे में कैद भी कर सकेंगे। लाखों सैलानियों की मांग को देखते हुए वन विभाग ने ड्रोन कैमरा चलाने की परमिशन दे दी है हालांकि इसमें कुछ शर्तें भी लागू की जाएंगी। वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड के जिम कार्बेट सहित अन्य नेशनल पार्क, सेंचुरी और कंजर्वेशन रिजर्व में नैनो ड्रोन (250 ग्राम से कम वजन) से फोटो व वीडियोग्राफी करने की सुविधा मिल सकेगी। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए आपको कुछ चार्जेज देने होंगे। अलग-अलग जगहों के हिसाब से वन विभाग ने दरें निर्धारित की है। हालांकि, सुरक्षा की नजर  से अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगे क्षेत्रों में ड्रोन कैमरे को चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उत्तराखंड फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स के समन्वयक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि ड्रोन से एरियल फोटो-वीडियोग्राफी से आकर्षण बढ़ेगा और पर्यटक यहां की वादियों को कैद करने के लिए आएंगे। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने स्पष्ट किया है कि जंगलों में 250 ग्राम से कम वजन के ड्रोन कैमरे के इस्तेमाल की अनुमति जरूरी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि तमाम अवसरों पर ड्रोन से फोटो-वीडियोग्राफी का चलन बढ़ा है। ऐसे में डीजीसीए की गाइडलाइन के हिसाब से ही विभाग ने वन्यजीव पर्यटन में नैनो ड्रोन की अनुमति देने का फैसला किया है। ड्रोन कैमरे का गलत इस्तेमाल न हो सके, इसके लिए निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के डीएफओ स्तर के अधिकारियों को दी गई है। 

‘पर्यटन एवं रोजगार: सभी के लिए बेहतर भविष्‍य की संभावनाएं’

27 सितंबर को पूरी दुनिया विश्व पर्यटन दिवस मनाएगी। इस बार इस विशेष दिन को होस्ट करने की जिम्मेदारी हमारे देश को मिली है और इसकी थीम ‘पर्यटन एवं रोजगार: सभी के लिए बेहतर भविष्‍य’ रखी गई है। भारत एक ऐसा देश है जहां पर्यटन में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इसका हर प्रदेश अपने में ऐसी कई  खूबियों को समेटे हैं कि पर्यटक इनकी सैर करने से खुद को रोक नहीं पाते। इसी बहाने हम इस बार चर्चा करेंगे कि पर्यटन में रोजगार कि क्या और बेहतर संभावनाएं हैं। 

रोमांच की दुनिया को करीब से समझाएगी मोदी ट्रेल

12 अगस्त को 150 देशों में टेलीकास्ट हुए डिस्कवरी चैनल के चर्चित टीवी शो मैन वर्सेज वाइल्ड को करोड़ों लोगों ने देखा, इसकी वजह थी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इससे जुड़ना। उनका मकसद जैव विविधता पर मंडराते वैश्विक खतरे के प्रति लोगों को जागरूक करना था। इस शो की शूटिंग उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट पार्क में हुई थी। दर्शकों की ओर से खूब पसंद किए जाने के चलते अब उत्तराखंड की सरकार शूटिंग वाली लोकेशन को विकसित करने की योजना बना रही है, जिसे मोदी ट्रेल का नाम दिया जाएगा। ग्रासहॉपर के इस अंक में आपको मोदी ट्रेल के बारे में बताएंगे।

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